फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand Election 2022: सबसे करनी का हिसाब लेती है मायापुरी, किसी को सत्ता नवाजी तो किसी को वनवास

Thu, 03 Feb 2022 03:27 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार

सार

जिस जनसंघ को कांग्रेस ने धर्मनगरी में कभी पनपने नहीं दिया, वह ऐसी जमीं कि हिलाए न हिली। लंबा इतिहास बदलने और बरकरार रखने की जंग आज भी चल रही है।
 
विज्ञापन
हरिद्वार - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महामाया की नगरी पंचपुरी हिसाब-किताब सबका रखती है। आजादी के बाद इसने किसी को सत्ता नवाजी तो किसी को लंबे वनवास पर भेजा। राजनीति का यह वनवास पक्ष ने भी भोगा और विपक्ष ने भी। यह जरूर है कि कांग्रेस का वनवास कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया। 

विज्ञापन


विपक्ष के चेहरे भी बदलते रहे और पक्ष के भी। जिस जनसंघ को कांग्रेस ने धर्मनगरी में कभी पनपने नहीं दिया, वह ऐसी जमीं कि हिलाए न हिली। लंबा इतिहास बदलने और बरकरार रखने की जंग आज भी चल रही है। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा की सीटें कहीं बिजनौर तक फैली थी तो कहीं देहरादून और परवादून तक थी।

 Uttarakhand Assembly Election 2022:  महिलाओं के लिए कांग्रेस लाई 51 घोषणाओं का शगुन, यहां पढ़ें...
विज्ञापन

ये भी पढ़ें...Uttarakhand Assembly Elections : प्रदेश में मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर गरमाई सियासत, निशाने पर रावत

1985 में हरिद्वार के तहसील बनने और 1988 में जिला बनने पर विधानसभा की तीन और लोकसभा की एक सीट हो गई। ये सीटें हरिद्वार, लक्सर और रुड़की के नाम से बनाई गई थी। उत्तराखंड बनने के बाद नया परिसीमन हुआ। सीटों की संख्या बढ़कर 11 हो गई। आजादी के बाद 1985 तक अधिकतर कांग्रेस पार्टी का एक क्षत्र राज रहा।
विज्ञापन


1967 निर्दलीय घनश्याम गिरी जीते। लेकिन कार्यकाल पूरा न कर सके।  हरिद्वार विधानसभा सीट कांग्रेस ने आखिरी बार 1985 में जीती। उसके बाद इस महत्वपूर्ण सीट पर कांग्रेस वनवास पर चली गई। नवगठित उत्तराखंड में कांग्रेस एक बार भी गंगानगरी में परचम नहीं लहरा पाई।

इन वर्षों में जनता दल के वीरेंद्र सिंह और सपा के अंबरीष कुमार एक-एक बार जीते। भाजपा के आचार्य जगदीश मुनि दो बार और भाजपा के ही मदन कौशिक चार बार विधायक बने। संसदीय और विधानसभा की दृष्टि से हरिद्वार दशकों तक कांग्रेस का गढ़ बना रहा। अब विजयश्री की लगातार प्रतीक्षा है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें