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Uttarakhand Election 2022: डोईवाला से मैदान में नहीं उतरेंगे पूर्व सीएम त्रिवेंद्र, कहा- इस बार चुनाव लड़ाना है

Wed, 19 Jan 2022 04:07 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कार्यकर्ताओं के बीच यह संकेत दिए हैं। जिसके बाद यह संभावना जताई जा रही है कि वह डोईवाला विधानसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे।
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trivendra singh rawat - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। दो दिन पहले तक वह डोईवाला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके थे, लेकिन अचानक उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर चुनाव न लड़ने की इच्छा जाहिर की है। नड्डा को भेजा गया पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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यह पत्र सार्वजनिक होने से पहले त्रिवेंद्र ने बुधवार को अपने चुनाव क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और बैठक में ही साफ कर दिया कि इस बार केंद्रीय नेतृत्व उनके कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी डाल रहा है, इसलिए वह चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि चुनाव लड़ाएंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, त्रिवेंद्र का चुनाव न लड़ने का खुलासा अनायास नहीं है। केंद्रीय संगठन की ओर से उन्हें अवगत करा दिया गया कि उन्हें पार्टी डोईवाला सीट से उम्मीदवार नहीं बना रही है।

डोईवाला से भाजपा का प्रत्याशी कौन
टिकटों का एलान होने से पहले डोईवाला सीट से त्रिवेंद्र सिंह रावत के दावेदारी छोड़ने से अब सबकी जुबान पर एक ही प्रश्न है कि चुनाव में भाजपा का प्रत्याशी कौन होगा? पार्टी किस चेहरे पर दांव खेलेगी?
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टिकट की दौड़ में कई दावेदारों ने लगाया दम 
त्रिवेंद्र सिंह रावत के मैदान से हटने के बाद अब टिकट की दौड़ में शामिल दावेदारों ने दम लगाना शुरू कर दिया है। त्रिवेंद्र की दावेदारी के सामने वे अपने लिए खुलकर लॉबिंग नहीं कर पा रहे थे लेकिन अब वे टिकट की दौड़ में शामिल हो गए हैं। 

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सीट पर तेजी से उभरे कई नाम
डोईवाला विधानसभा सीट पर अब तेजी से कई दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। जिन नामों की चर्चा शुरू हो गई है, उनमें भाजपा नेता बृजभूषण गैरोला, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के विधानसभा प्रतिनिधि धीरेंद्र सिंह पंवार, प्रदेश सरकार में दर्जाधारी रहे करन बोहरा, पूर्व विधायक स्व. राजेंद्र शाह के बेटे अमित शाह, सौरभ थपलियाल, जिला ग्रामीण मंडल के अध्यक्ष शमशेर सिंह पुंडीर नाम प्रमुख हैं।   

त्रिवेंद्र सिंह रावत की राय अहम
डोईवाला विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी के नाम पर 2002, 2007, 2017 विधानसभा चुनावों में विधायक रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत की राय अहम मानी जा रही है। परंपरागत रूप से यह सीट भाजपा दबदबे वाली है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार प्रत्याशी बदलने के बाद मुकाबला बेहद रोचक होगा।
 

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मैदान से क्यों हटे त्रिवेंद्र 

सियासी हलकों में यह सवाल भी तैर रहा है कि आखिर प्रत्याशियों के एलान से पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत मैदान से क्यों हट गए? क्या पार्टी उनका टिकट काटने जा रही थी? या भाजपा उन्हें चुनाव लड़ाकर सरकार बनने की स्थिति में मुख्यमंत्री के नाम पर कोई संशय पैदा नहीं होने देना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन की ओर से केंद्रीय नेतृत्व को यह फीडबैक है कि चुनाव क्षेत्र में त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ माहौल है। हालांकि, त्रिवेंद्र समर्थकों का मानना है कि विरोध का माहौल आम जन में नहीं बल्कि पार्टी के कुछ नेताओं के बीच है।

तो क्या भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनेंगे त्रिवेंद्र
त्रिवेंद्र के चुनाव लड़ने और उन्हें अहम जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना के बीच यह प्रश्न भी सामने आया कि क्या पार्टी उन्हें प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बना सकती है? प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक हरिद्वार सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव के दौरान वह संगठन को अधिक समय नहीं दे पाएंगे। माना जा रहा है कि उनकी जगह त्रिवेंद्र को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि इस पद के लिए पार्टी के महामंत्री राजेंद्र भंडारी, कुलदीप कुमार, सुरेश भट्ट और डॉ. देवेंद्र भसीन के नाम पर चर्चाओं में हैं।

धामी के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए पूरा समय लगाना चाहता हूं : त्रिवेंद्र 
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को डेढ़ पन्ने का पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि यह मेरा परम सौभाग्य है कि पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया। पीएम मोदी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मिला। उनका धन्यवाद करना चाहूंगा। डोईवाला विस वासियों का ऋण तो कभी चुकाया नहीं जा सकता, उनका भी कृतज्ञ भाव से धन्यवाद करता हूं। मेरा विश्वास है कि क्षेत्र के लोगों का आशीर्वाद पार्टी को आगे भी मिलता रहेगा। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हुआ।

पुष्कर सिंह धामी के रूप में युवा नेतृत्व मिला। बदली राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। मैं अपनी भावनाओं को पूर्व में भी अवगत करा चुका हूं। मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं, राष्ट्रीय सचिव, झारखंड प्रभारी, यूपी लोस 2014 में सह प्रभारी जिम्मेदारी निभा चुका हूं। महाराष्ट्र, दिल्ली, चंडीगढ़, हिमाचल पंजाब, हरियाणा चुनाव अभियानों में काम कर चुके हैं। वह धामी के नेतृत्व में पुन: सरकार बने, उसके लिए पूरा समय लगाना चाहता हूं। मेरे चुनाव न लड़ने के अनुरोध को स्वीकार करें ताकि सरकार बनाने के लिए संपूर्ण प्रयास कर सकूं। 
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