कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब से केंद्र में मोदी सरकार आई है, देश में गरीबी, महंगाई और सामाजिक तनाव बढ़ा है। भाजपा के पास कोई एजेंडा नहीं है, इसलिए वह चुनाव में हिंदुस्तान-पाकिस्तान, हिंदू-मुसलमान, कब्रिस्तान-शमशान जैसे मुद्दों को आगे कर देती है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा चुनाव में ऐसा माहौल बनाने का प्रयास कर रही है जैसे 2014 से पहले भगवान राम का अस्तित्व ही समाप्त हो गया था। पीएम नरेंद्र मोदी के कुछ चाटुकार लोग राम मंदिर को लेकर जिस प्रकार की प्रशंसा कर रहे हैं, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि आज मसला मंदिर-मस्जिद का नहीं है, आज मसला है महंगाई का, भूख का और बेरोजगारी का है। इस पर भाजपा बात करके तैयार नहीं है।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से सांप्रदायिक कटुता के खिलाफ रही है। देश की आजादी के समय से कांग्रेस अगर हिंदू महासभा, आरएसएस के खिलाफ लड़ती थी तो दूसरी तरफ मुस्लिम लीग और जमाते इस्लामी के खिलाफ भी लड़ती थी। उन्होंने कहा कि हम खुलेआम इस बात को कहते हैं कि भाजपा और एमआईएम का आपस में गठजोड़ है। केवल धार्मिक उन्माद फैलाकर यह लोग अपना राजनीतिक स्वार्थ पूरा करना चाहते हैं।
पेगासस के जरिये निर्दोषों को फंसाया जा रहा
दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार पेगासस के माध्यम से निर्दोष लोगों के ई मेल में, व्हाइटसएप में झूठे सबूत प्लांट कर उनको फंसा रही है। दिग्विजय ने एक्टिविस्ट सुधा भारद्वाज का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने आईआईटी ग्रेजुएट होने के बाद भी छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोगों के बीच में काम करना पसंद किया। उन पर पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया। आज तक चार्जशीट पेश नहीं की गई। साढ़े तीन साल उनको जेल में रखने के बाद भी आज तक एक भी सबूत नहीं मिला। दिग्विजय ने आरोप लगाया कि पेगासस के माध्यम से उनके व्हाटसएप और ईमेल में झूठे सबूत डालकर षडयंत्र किया गया। दिग्विजय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बावजूद आज तक केंद्र सरकार यह नहीं बता पाई की, उसने यह सॉफ्टवेयर खरीदा या नहीं।
देश में बढ़ रही अमीर-गरीब की खाई
दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में अर्थव्यवस्था पूरी तरह से गड़बड़ा गई है। आज देश में अमीर और अमीर हो रहे हैं, जबकि गरीब और गरीब हो रहे हैं। अमीर और गरीब के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। मनरेगा के सवाल पर बोले कि पीएम मोदी कहते थे कि इस योजना को हम इसलिए खत्म नहीं करना चाहते कि यह यूपीए सरकार की विफलताओं, उसकी भूल का सबसे बड़ा उदाहरण है, जबकि इसी मनरेगा ने लोगों को कोविडकाल में सहारा दिया। जबकि इस बार उसका 25 प्रतिशत बजट कम कर दिया गया है।