2017 के विधानसभा चुनाव में गंगोत्री विस सीट से टिकट नहीं मिलने पर सूरत राम नौटियाल बागी हो गए थे और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। पार्टी ने गोपाल सिंह रावत को टिकट दिया था, जो चुनाव जीते। लेकिन नौटियाल ने भी इस चुनाव नौ हजार से अधिक वोट हासिल किए थे।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह 1969 में जनसंघ से जुड़े और राष्ट्रीय स्वयंसेवक और भाजपा में रहे। इस दौरान ओबीसी, राम मंदिर व अन्य आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और जेल भी गए।
सात ग्राम प्रधानों समेत 15 लोग साथ में शामिल हुए
भाजपा में शामिल हुए सूरत राम नौटिया के साथ शिव सिंह भंडारी, अजय पाल सिंह राणा, हरि प्रसाद नौटियाल, रविंद्र प्रसाद सेमवाल, पवन डिमरी, केशव नौटियाल, नवीन राणा, राकिशोर राणा, धर्मेंद्र रमोला, कुलदीप रावत, धन सिं राणा, सुरेश खंडूड़ी, राजीव बहुगुणा, दीनानाथ नौटियाल व अनुज मिश्रा ने भी पार्टी ज्वाइन की। इनमें सात ग्राम प्रधान हैं।