बंगाली समाज के लोगों को साधने के लिए पार्टी ने सांसद लॉकेट चटर्जी को सह चुनाव प्रभारी बनाया है और उन्हें यूएसनगर की उन सीटों की जिम्मेदारी दी है, जहां बंगाली मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने का दमखम रखते हैं। इतना ही नहीं जातीय समीकरणों को साधने के देहरादून और हरिद्वार में दो केंद्रीय नेताओं को मोर्चा संभाल रहे हैं।
इनमें पार्टी के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और प्रदेश सह प्रभारी रेखा वर्मा की दोनों जिलों में ओबीसी और दलित वर्ग के बीच सक्रियता बढ़ी है। सियासी चौसर पर बैठाए गए इन मोहरों के साथ पार्टी ने उन नेताओं और कार्यकर्ताओं की टीम को लगाया है जिनका अपने-अपने वर्ग में प्रभाव है। इन्हीं नेताओं और कार्यकर्ताओं के जरिये विभिन्न सम्मेलनों, सभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश है।
उत्तराखंड में कांग्रेस की भी सिख और अनुसूचित जाति के मतदाताओं पर नजर है। पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की घरवापसी को कांग्रेस के लिए बड़ा चुनावी दांव मान रही है। आर्य के जरिये पार्टी दलित वोट बैंक पर सेंध लगाना चाहती है। कुमाऊं में पार्टी के पास अभी तक प्रदीप टम्टा बड़ा चेहरा थे। आर्य के आने से कांग्रेस को दूसरा बड़ा दलित चेहरा मिला है।