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Uttarakhand: आरक्षण रोस्टर पर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया पेयजल निगम, जानिए क्या है पूरा मामला

Wed, 02 Mar 2022 04:01 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

पेयजल निगम के जूनियर इंजीनियर सुनील कुमार ने नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता देने की मांग की थी। जबकि, विभाग ने ज्येष्ठता नियमावली के तहत वरिष्ठता तय की थी। हाईकोर्ट में फैसला सुनील कुमार के पक्ष में आया था।
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सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media
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विस्तार
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कर्मचारियों को मेरिट के बजाए आरक्षण के आधार पर वरिष्ठता तय करने के आदेश को लेकर पेयजल निगम फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में पेयजल निगम ने पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। पेयजल निगम में सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद प्रदेश में पहली बार कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची मेरिट के बजाए आरक्षण के रोस्टर के अनुसार निर्धारित की गई थी।

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आदेश के बाद पेयजल निगम ने जेई की वरिष्ठता सूची आरक्षण के रोस्टर के अनुसार तय की गई थी। निगम के जूनियर इंजीनियर सुनील कुमार ने नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता देने की मांग की थी। जबकि, विभाग ने ज्येष्ठता नियमावली के तहत वरिष्ठता तय की थी। हाईकोर्ट में फैसला सुनील कुमार के पक्ष में आया था। दूसरे इंजीनियरों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

रोस्टर पर चल रहा था विरोध

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठता, भर्ती के लिए तय आरक्षण के रोस्टर के अनुसार निर्धारित करने का फैसला दे दिया था। फैसला लागू नहीं करने पर अवमानना याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जल निगम को नोटिस जारी किया तो निगम ने आरक्षण के रोस्टर के आधार पर नई वरिष्ठता सूची जारी कर दी थी। बावजूद इसके इस रोस्टर पर विरोध चल रहा था।
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उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन इसके विरोध में उतर आई थी। वहीं, उत्तराखंड एससी-एसटी इंप्लाइज फेडरेशन ने मांग की थी कि आरक्षण रोस्टर का लाभ 2005 के बजाए नौ नवंबर 2000 के हिसाब से दिया जाए। सभी पक्ष इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में थे।
 

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अभी तक केवल भर्तियों में ही है आरक्षण रोस्टर

इस बीच चूंकि उत्तराखंड में आरक्षण रोस्टर केवल भर्तियों में लागू होता है और वरिष्ठता में नहीं तो पेयजल निगम इस आधार पर दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। निगम ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है, जिस पर एक-दो दिन में सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस याचिका को स्वीकार करने और उस पर आदेश के आधार पर ही आरक्षण रोस्टर का भविष्य तय होगा।

उत्तराखंड में अभी तक सिर्फ भर्ती के दौरान ही आरक्षण रोस्टर लागू होता है। निगम ने इसे अब वरिष्ठता में भी लागू कर दिया है। नए नियम के अनुसार अब वरिष्ठता का पहला पद अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी को मिलेगा। भले ही वह मेरिट में कितना भी नीचे हो। दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवां पद सामान्य, छठा पद एससी, सातवां पद ओबीसी, आठवां, नौवां, दसवां सामान्य, 11वां पद एससी को मिलेगा।

आरक्षण रोस्टर का यह हुआ था असर
मेरिट के आधार पर तय हुई वरिष्ठता में जूनियर इंजीनियर दौलत राम सेमवाल 18वें स्थान से खिसककर 25वें स्थान पर आ गए। जीतमणि बेलवाल आठवें से दसवें, अनिल शर्मा 120वें से 143वें, सुभाष चंद्र भट्ट 15 से 22वें स्थान पर खिसक गए।

प्रदेश में अभी तक केवल भर्तियों में आरक्षण रोस्टर के पालन का नियम है। वरिष्ठता केवल मेरिट के आधार पर ही निर्धारित होती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश और फिर अवमानना नोटिस के बाद वरिष्ठता में आरक्षण रोस्टर लागू किया गया है। अब हमने दोबारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। हमारे चीफ इंजीनियर कल दिल्ली पहुंचेंगे। 
- उदय राज सिंह, एमडी, पेयजल निगम
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