राजनीति में कई घटनाएं बेगैरत होती हैं। दैवी आपदा की तबाही का मंजर देखने उत्तराखंड आए मौजूदा प्रधानमंत्री व गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया।
लेकिन राजनीति आडे़ आ गई, तमाम कांग्रेसी चिल्लाएं, कांग्रेस सरकार इतनी कमजोर नहीं है कि अपना काम गुजरात सरकार से कराए। वो दिन है और आज का दिन। केदारघाटी में अवस्थापना का काम शुरू नहीं हुआ और अभी भी नरकंकालों का मिलना जारी है।
यह वाक्या 22 जून 2014 का है। जान माल का नुकसान देखने उत्तराखंड आए नरेंद्र मोदी ने दौरा करने के बाद देर शाम को सीएम आवास पर तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से मुलाकात की।
बगैर राजनीति के काम करने की इच्छा
गुजरात के तत्कालीन सीएम व मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी ने दैवी आपदा में ध्वस्त हुए केदारनाथ मंदिर परिसर व आस पास के स्थानों को आधुनिक तरीके से पुननिर्माण का जिम्मा लेने की इच्छा व्यक्त की है।
उन्होंने तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा से बातचीत में यह प्रस्ताव दिया कि गुजरात सरकार पुण्य के इस कार्य को बगैर राजनीति के करना चाहती है।
लगभग एक घंटे की मुलाकात में नरेंद्र मोदी ने विजय बहुगुणा के साथ भ्रमण के अनुभव बांटे और उन्होंने केदार घाटी व आस पास के स्थलों को आधुनिक तरीके से पुननिर्मित करने की बात कही।
लेकिन सरकार का जवाब नहीं मिला
मोदी ने यह भी कहा कि इसके पीछे कोई राजनीति नहीं है,गुजरात सरकार यह धार्मिक कृत्य करने की इच्छुक है। उन्होंने ने यह तर्क भी दिया कि विश्व स्तरीय कंपनियों से वह सारा काम कराएंगे और पूरा खर्च गुजरात सरकार वहन करेगी।
मोदी ने बहुगुणा से यह भी कहा कि हम इस काम को इसलिए करना चाहते है क्योंकि 2002 के भूकंप के बाद गुजरात ने जो काम किया उसका अनुभव भी उनके पास है।
मोदी ने उस समय केदार घाटी, हर्षिल से लेकर धारचूला तक तमाम स्थानों को देखा है। उस समय मोदी चाहते थे कि यदि उत्तराखंड सरकार यह कार्य गुजरात को देती है तो पुनर्निर्माण का काम ऋषिकेश से ही शुरू करेंगे।
लेकिन सरकार का जवाब तो नहीं मिला लेकिन कांग्रेसियों ने तोहमतें जरूर मढ़ी और यहां तक कहा कि क्या उत्तराखंड सरकार सक्षम नहीं है। कांग्रेस सरकार यह काम खुद करेगी। लेकिन अभी तक कांग्रेस सरकार ने जो किया वह सभी के सामने है।