बुधवार को शासन ने स्पष्ट किया कि देवस्थानम बोर्ड का गठन जल्द हो जाएगा। बोर्ड का गठन होते ही सीईओ तैनात किया जाएगा और बोर्ड की बैठक होगी। इस बैठक में ही बद्री केदार मंदिर समिति सहित अन्य मामलों में बोर्ड को फैसला लेने का अधिकार भी मिल जाएगा।
बोर्ड के गठन का विधिवत प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री को भेज दिया गया है। उम्मीद है के तीन चार दिन में ही बोर्ड गठन को स्वीकृति मिल जाएगी। जहां तक अन्य मामलों का सवाल है, वह अधिनियम के लागू होते ही साफ हो गए हैं। देवस्थानम अधिनियम अब अन्य सभी कानूनों पर लागू है। लिहाजा बद्री केदार मंदिर समिति भी अपनी तरफ से कोई वित्तीय या प्रशासनिक फैसला नहीं कर सकती।
- दिलीप जावलकर, सचिव पर्यटन
देवस्थानम अधिनियम का विरोध जारी है। तीर्थ पुरोहित महापंचायत सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने के लिए अधिवक्ता और सुब्रमण्यम स्वामी से संपर्क साध ही चुकी है। स्वामी भी जनहित याचिका दायर करने पर सहमति दे चुके हैं। अब तीर्थ पुरोहितों को याचिका के दायर होने का इंतजार है। बोर्ड गठन से पहले ही याचिका दायर होती है और सुप्रीम कोर्ट याचिका को स्वीकार कर लेता है तो प्रदेश सरकार को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।
बद्रीनाथ में बाजियों को मिलता है दस्तूर
तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव हरीश डिमरी के मुताबिक बद्रीनाथ मंदिर में बाजियों को दस्तूर मिलता है। इनके अधिकार परंपरा के तहत सुरक्षित हैं। देवस्थानम अधिनियम के नाम पर अधिकारों से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। हाल ही में विधि आयोग ने देवस्थानम अधिनियम के बाजियों के अधिकारों को स्पष्ट करने का संस्तुति भी की। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर का कहना है कि इस प्रस्ताव पर बोर्ड गठन के बाद ही विचार किया जा सकता है।