उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखंड दर्शन नाम की एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जा रही है।
23 मिनट लंबे गीत पर आधारित फिल्म में उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा, भूगोल, इतिहास, पुरातत्व, देव स्थल और खूबसूरत वादियों के फिल्मांकन का प्रयास किया जा रहा है।
फिल्म का करीब 60 फीसदी हिस्सा लोगों की मदद से पूरा कर लिया गया है, लेकिन शेष भाग के निर्माण के लिए आर्थिक दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। करीब 23 मिनट की इस गीत-संगीतमय डाक्यूमेंट्री के निर्माण के लिए अभी करीब 5 लाख रुपए की दरकार है।
डाक्यूमेंट्री बनाने वाले हिमवते दिव्य दृष्टि समिति के अध्यक्ष राकेश उनियाल का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार से आर्थिक मदद मिल जाए तो वह राज्य को अनमोल तोहफा जल्द बनाकर दे पाएंगे। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति-परंपरा से भी लोग रूबरू हो सकेंगे।
विभिन्न भूमिकाओं में 40 से अधिक कलाकार
राकेश बताते हैं कि अभी तक सरकार के संस्कृति विभाग से दो लाख रुपए की मदद मिली है। हालांकि, संस्कृति विभाग ने ढाई लाख रुपए देने का वादा किया था। फिल्म बनाने के लिए करीब दो लाख रुपए का उन्होंने कर्ज भी लिया है।
पांच लाख से अधिक रुपयों की मदद लोगों ने की है। लेकिन इससे फिल्म पूरी नहीं हो पाई है। राकेश बताते हैं कि प्रदेश की 50 से अधिक जगहों पर फिल्म की शूटिंग की जानी है। इसमें 40 से अधिक कलाकार विभिन्न भूमिकाओं में नजर आएंगे।
फिल्म का अभी तक 60 प्रतिशत भाग ही शूट हो पाया है। आर्थिक दिक्कतों की वजह से 40 प्रतिशत भाग की शूटिंग नहीं हो पा रही है।
वैसे तो फिल्म में गीतों के बोल गढ़वाली में हैं लेकिन उन्हें सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है। कई जगहों पर हिंदी के शब्दों का प्रयोग किया गया है, ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक उसे अच्छी तरह से समझ सकें।
दो भागों में होगी फिल्म
राकेश उनियाल बताते हैं कि डाक्यूमेंट्री को दो भागों में बनाया जाएगा। आधे हिस्से में गढ़वाल के स्थलों और यहां की संस्कृति एवं ऐतिहासिक पुरुषों और जगहों को चित्रित किया जाएगा।
दूसरे भाग में कुमाऊं की संस्कृति और वहां के पर्यटक एवं पौराणिक स्थलों का फिल्मांकन किया जाएगा। फिल्म की थीम उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि, लेखक, पत्रकार एवं समाजसेवी स्वर्गीय धर्मानंद उनियाल पथिक की बहुचर्चित रचना उत्तराखंड दर्शन पर आधारित है।
गीत को प्रदेश की प्रसिद्ध लोक गायिका रेखा धस्माना उनियाल ने गाया है और उनका साथ दिया है सत्या अधिकारी ने। गीत को संगीतबद्ध करने में बीरेंद्र नेगी ने प्रमुख भूमिका निभाई है। तैयार फिल्म के हिस्से को www.rekhauniyal.com देखा सुना जा सकता है।
अपने प्रदेश में फिल्मांकन की अनुमति नहीं
वैसे तो प्रदेश सरकार फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने की बात करती है लेकिन यदि कोई यहां शूटिंग करना चाहता है तो उसे तमाम अड़चनों से गुजरना पड़ता है।
वन विभाग से लेकर जिला प्रशासन और देव स्थलों के पुजारियों एवं अधिकारियों तक के सामने गिड़गिड़ाना तक पड़ता है। इसके बावजूद बिना पैसा लिए कोई शूटिंग नहीं करने देता है। राकेश उनियाल का अनुभव इस बारे में काफी कटु रहा है। वर्ष 2009 उन्होंने इस फिल्म पर कार्य आरंभ किया था।
तब से लेकर अब तक तमाम जगहों पर फिल्म की शूटिंग के लिए दिक्कतें पेश आई हैं। कहीं वन विभाग ने शूटिंग नहीं करने दी तो कहीं पर आईटीबीपी ने। बदरीनाथ में तो मुख्य धर्माधिकारी ही अड़ गए थे।