76 प्रतिशत उद्योग आ गए हैं खतरे में
जनसुनवाई में उद्योग प्रतिनिधि राजीव अग्रवाल ने कहा कि यूपीसीएल और पिटकुल हमें चूना लगा रहे हैं। तीनों ऊर्जा निगम पूंजीकरण का खेल खेल रहे हैं, जो उद्योगों पर भारी साबित हो रहा है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि एलटी टैरिफ में हम यूपी, हिमाचल से आगे हैं। सरकारी उपक्रमों से बिल वसूली न करके यूपीसीएल उद्योगों पर बोझ बढ़ा रहा है। मांग की कि बढ़ोतरी न की जाए, इससे पलायन बढ़ रहा है। उद्योग प्रतिनिधि पवन अग्रवाल ने कहा कि हमें अपना टैरिफ यूपी से डेढ़ से दो रुपये सस्त करना होगा, तभी उद्योग यहां आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ही 30 पैसे सेस, 10 पैसा रॉयल्टी और 60 पैसा वाटर टैक्स के नाम पर उपभोक्ताओं से ले रही है। इसी से टैरिफ का समायोजन किया जाए। उद्योग प्रतिनिधि डॉ. हरेंद्र गर्ग ने कहा कि राज्य में 76 प्रतिशत उद्योग ऐसे हैं जो कि थर्ड पार्टी जनरेटर यानी दूसरों के लिए काम करते हैं। 20 साल पहले उन्हें जो मेहनताना मिलता था, आज भी वही मिलता है जबकि बिजली के दामों में भारी उछाल आ चुका है। मांग की कि बढ़ोतरी न की जाए वरना उद्योगों से जुड़े आठ लाख से अधिक कर्मचारी बेरोजगारी के खतरे में आ जाएंगे।
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स्मार्ट मीटर में गड़बड़ लगे तो तुरंत बताएं, चेक मीटर लगाएंगे
स्मार्ट मीटर को लेकर भी उपभोक्ता खफा नजर आए। कई उपभोक्ताओं का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उनका बिल लगभग दोगुना हो गया। हालांकि यूपीसीएल प्रतिनिधियों का कहना था कि अगर किसी के स्मार्ट मीटर में कोई गड़बड़ी लग रही है तो वह यूपीसीएल को बताए, चेक मीटर लगाया जाएगा। यूपीसीएल प्रबंधन ने स्मार्ट मीटर को लेकर सुझाव भी मांगे। पहली बार आयोग में इतनी भीड़ उमड़ी।