प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पी चिदंबरम द्वारा उत्तराखंड सरकार के खिलाफ पैरवी के मामले को आलाकमान के सामने उठाने को कहा है। चिदंबरम द्वारा अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ पैरवी करने से पार्टी को अपना बचाव करने में मुश्किल में हो रही है। वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इशारों-इशारों में चिदंबरम पर तीर चला गए।
दरअसल बृहस्पतिवार को पूर्व वित्त मंत्री और सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ दो शराब कंपनियों की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका की पैरवी की थी। खास बात यह रही कि पी. चिदंबरम के आने की खबर सुनकर कांग्रेसी उनके स्वागत को पहुंच गए थे। लेकिन जैसे ही मामले का पता चला सब उल्टे पांव वापस लौट गए।
यहीं नहीं चिदंबरम की पैरवी के बाद हाईकोर्ट ने दोनों शराब कंपनियों को राहत दे दी। इस मामले में कांग्रेस की काफी किरकिरी हुई है। अब पार्टी इसे आलाकमान के सामने उठाने की तैयारी कर रही है।
'गांधी और नेहरू भी वकील पर पार्टी की गरिमा का रखा ध्यान'
‘महात्मा गांधी और मोती लाल नेहरू भी बहुत बड़े वकील थे। उन्होंने पार्टी की गरिमा का हमेशा ख्याल रखा। लेकिन चिदंबरम ने सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में पैरवी कर कांग्रेस की गरिमा के खिलाफ काम किया है। उन्हें अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ पैरवी कर पार्टी को असहज नहीं करना चाहिए था तथा पार्टी की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए था। इस मामले में पार्टी आलाकमान से बात की जाएगी।’
-किशोर उपाध्याय, कांग्रेस अध्यक्ष उत्तराखंड
पता होता तो एक गुलदस्ता मैं भी भेज देता: सीएम
‘वकालत चिदंबरम का पेशा है। उन्होंने जो सही समझा, वही किया। किसी की आमदनी के स्रोत को नहीं रोका जा सकता। हां, अगर मुझे पता होता कि चिदंबरम आ रहे हैं तो मैं भी एक गुलदस्ता भेज देता। चिदंबरम के हाईकोर्ट में दिए गए तर्कों से मैं सहमत नहीं हूं। हालांकि उनकी शराब कंपनियों की पैरवी करने से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। महात्मा गांधी और मोती लाल नेहरू के समय नैतिकता के आधार पर राजनीति होती थी। आज राजनीति में नैतिकता नहीं रही। कई बार सरकार के तौर पर सभी लोग बैठकर एक निर्णय करते हैं मगर कोर्ट में सरकार के ही लोग उसका विरोध कर देते हैं। फिर भी सहिष्णुता कांग्रेस का गहना है।’
-हरीश रावत, सीएम उत्तराखंड।