सीएम ने कहा कि राज्य में जिन व्यक्तियों ने पर्यटन, उद्योग, शिक्षण संस्थान जैसी गतिविधियों के लिए अनुमति लेकर जमीन खरीदी, लेकिन उसका उपयोग इस प्रयोजन के लिए नहीं किया, उनका विवरण भी तैयार कराया जा रहा है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनकी जमीनें भी राज्य सरकार में निहित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि 2018 में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) में हुए संशोधन का सकारात्मक परिणाम नहीं है। इसके तहत 12.50 एकड़ से अधिक जमीन खरीद के प्रावधानों की समीक्षा होगी और उन्हें खत्म किया जाएगा।
निवेशक परेशान न हों
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बचाने के उद्देश्य से उठाए जा रहे इन कदमों से किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्थाओं को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, जिनके निवेश से उत्तराखंड में पर्यटन, शिक्षा, उद्योग, व्यापार आदि विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन होता है और अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। निवेशकों के लिए सरकार भूमि उपलब्ध कराएगी।
समीक्षा बैठक के बाद तय होगा कब लागू होगा यूसीसी
सीएम धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस से पहले समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया जाए। यूसीसी को लेकर गठित समिति एक-एक प्रावधान पर गहन अध्ययन कर रही है। अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में समिति की समीक्षा बैठक प्रस्तावित है। जिसके बाद ही तय होगा की यूसीसी कब लागू करना है।