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Uttarakhand: सीएम धामी ने किया DDRS का शुभारंभ, QR CODE से होगा पहाड़ों में प्लास्टिक कचरे का निपटान

Wed, 28 Aug 2024 05:07 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक की खपत को कम करने व अधिक से अधिक प्लास्टिक को रिसाइकल कर उसे इस्तेमाल में लाने के लिए डिजिटल डिपॉजिट रिफन्ड सिस्टम एक महत्वपूर्ण कदम है।
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प्लास्टिक रिसाइकल करते सीएम धामी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश सरकार डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम (डीडीआरएस) से चारधाम और राज्य के पर्यटक स्थलों से प्लास्टिक कचरा एकत्रित करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को राज्य सचिवालय में इसकी शुरुआत की।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस योजना के तहत प्लास्टिक की बोतल के बार कोड को स्कैन कर डिजिटल पेमेंट प्राप्त किया जा सकेगा। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने बोतल के बार कोड को स्कैन कर डिजिटल पेमेंट प्राप्त की। इस अवसर बताया गया कि डीडीआरएस से पहाड़ी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे का एकत्रीकरण सरल हो जाएगा। इसके तहत निर्माण इकाइयां क्यूआर कोड वाली प्लास्टिक बोतल व प्लास्टिक पदार्थों का उत्पादन करेंगे। जब उपभोक्ता प्लास्टिक पैकेजिंग में भंडारित पदार्थों का प्रयोग कर लेंगे तो उसके बाद प्लास्टिक अपशिष्ट को नज़दीकी डीडीआरएस सेंटर को वापस कर देंगे। बार कोड स्कैन करने के बाद उनको निश्चित धनराशि मिल जाएगी। इसके लागू होने से प्लास्टिक कचरे को सरकुलर इकोनॉमी में वापस लाया जा सकेगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण समिति विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक डॉ धनंजय मोहन, सदस्य सचिव उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी मौजूद रहे।
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दो साल पहले शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट

सीएम ने कहा कि डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम दो साल पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उत्तराखंड में शुरू हुआ था। इसके सफल संचालन के लिए उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले को डिजिटल इंडिया अवॉर्ड 2022 से भी सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा नदियां, जंगल, पहाड़ राज्य की धरोहर और पहचान है। प्लास्टिक हमारी इन धरोहरों को खतरे में डाल रही है। जिसके निपटारे के लिए राज्य सरकार विज्ञान एवं आधुनिक तकनीक के प्रयोग से कार्य कर रही है।
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