धराली में प्रकृति के कहर से बचकर बहुत से लोगों को प्रकृति ने ही पनाह दी थी। घर, होटल सब तबाह हुए तो परिवार धराली के पास जंगल की तरफ भाग गए। वहां आईटीबीपी के जवान मिले तो जान में जान आई। इसके बाद उन्हें वहां से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया जहां से उन्हें शुक्रवार को चिन्यालीसौंड़ और अन्य जगहों पर लाया गया। बहुत से लोगों को मंगलवार दोपहर में आई उस भयंकर त्रासदी एक बुरे और धुंधले सपने की तरह याद है।
आपदा के बाद वहां से जान बचाकर भागे बचन सिंह का परिवार भी शुक्रवार को चिन्यालीसौड़ हेलीपैड पर पहुंचा था। बचन सिंह की पत्नी के चेहरे पर उस भयावह मंजर का खौफ साफ नजर आ रहा था। हलक सूख रहा था और जबान लड़खड़ा रही थी। उनसे जब उस समय के बारे में पूछा गया तो बताया कि उन्हें कुछ याद नहीं कि क्या हुआ था। इतना पता है कि हमारा घर था, होटल था गाड़ी थी सब तबाह हो गया है। जब मलबा आया तो जैसे तैसे निकलकर हम जंगल की तरफ भागे थे। बारिश हो रही थी, बदन पर जो कपड़े थे बस वही सामान था।
वह कहती हैं कि जंगल न होता तो हम नहीं बच पाते। कुछ देर बाद वहां आईटीबीपी के जवान पहुंचे। उन्होंने ढांढस बंधाया और हमें अपने साथ एक जगह ले आए। तीन दिनों से उनके साथ ही थे। अब हेलिकॉप्टर से हमें यहां लाया गया है। हमारे पास अब कुछ नहीं बचा है जो कपड़े पहने हैं वह भी किसी दूसरे ने दिए हैं।
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ये सिर्फ बचन सिंह के परिवार की ही कहानी नहीं है। खीर गंगा के रौद्र रूप का शिकार हुए ऐसे कई परिवार हैं जिनका वहां दशकों का जमा हुआ कारोबार घर सब तबाह हो गया है। बहुत से लोग अपनों से बिछड़ गए हैं। किसी का अपना कोई मलबे में दबा है। एक दूसरे के गले लगकर रो रहे इन लोगों के दुख के आगे हर पत्थर दिल पसीज रहा है।