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Uttarakhand Chunav 2022: चंपावत विस सीट की ग्राउंड रिपोर्ट, वीआईपी नहीं लेकिन यहां से जुड़ा है खास मिथक

Tue, 08 Feb 2022 01:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal चंद्रशेखर जोशी, संवाद न्यूज एजेंसी, चंपावत

सार

सीधे मुकाबले वाली सीट में आम आदमी पार्टी समीकरण बिगाड़ सकती है।15 प्रतिशत मैदानी क्षेत्र में 50.66 प्रतिशत वोट है।
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चंपावत सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हेमेश खर्कवाल - फोटो : ANI (file photo)
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विस्तार
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की खटीमा सीट से लगी चंपावत विधानसभा सीट भले ही वीआईपी सीट नहीं है, लेकिन इसके साथ एक मिथक जुड़ने से यह महत्वपूर्ण जरूर है। जो प्रत्याशी यहां से जीता, उसी दल की सरकार बनी। भाजपा और कांग्रेस के दबदबे वाली इस सीट में बारी-बारी से दोनों दल जीतते रहे हैं।

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सीधे मुकाबले के बावजूद इस बार आम आदमी पार्टी चुनावी समीकरण बना-बिगाड़ सकती है। वर्ष 2012 में बसपा के टिकट से दूसरे नंबर पर रहे मदन सिंह महर 2017 में भाजपा के साथ थे, लेकिन इस बार आप ने उन्हें प्रत्याशी बना मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया है।

अल्मोड़ा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली 14 विधानसभा सीटों में सिर्फ चंपावत सीट ऐसी है, जिसमें पहाड़ के अलावा 15 प्रतिशत हिस्सा मैदान का भी है। 65 किमी नेपाल सीमा से लगी चंपावत सीट के मैदानी क्षेत्र में पहाड़ से 1286 वोट अधिक होने से इस सीट पर जातिगत समीकरण से ज्यादा क्षेत्रवाद की हवा बहती रही है।
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मैदान और पहाड़ वाली इस सीट में इसी वजह से सात में से छह प्रत्याशी मैदान से हैं। ऐसे में इस चुनाव में मतदाताओं के सामने दलीय प्रतिबद्धता, जाति और इलाकावाद में असमंजस है। खासकर राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों पर वोट करने वालों के लिए ऊहापोह ज्यादा है। सपा यहां कभी ताकत नहीं रही। चंपावत जिला बनाने वाली बसपा 2012 को छोड़ कभी जमानत नहीं बचा सकी।

क्षेत्रीय दल उक्रांद इस बार मैदान से बाहर है। आप के प्रत्याशी अकेले क्षत्रिय हैं, लेकिन कमजोर संगठन की वजह से उनकी उम्मीदें केजरीवाल के नाम और दिल्ली मॉडल के काम पर टिकी है। जीआईसी के पास मिले नवीन सिंह देउपा कहते हैं कि जाति का इस सीट पर ज्यादा महत्व नहीं है।

क्षेत्र की भूमिका के साथ कार्य प्रदर्शन का असर रहेगा। उनकी इस दलील को विकास भवन के पास चाय की दुकान चलाने वाले मुरली भी सही मानते हैं। कारोबारी प्रकाश पांडे कहते हैं कि जाति, धर्म और क्षेत्रवाद के बजाय विकास और वादों को लेकर ईमानदारी का असर रहेगा। नारायण राम कहते हैं कि विकास और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को देख लोग वोट देंगे। 

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पांच साल के कार्यकाल में विकास कार्यों के साथ लोगों की समस्या दूर करने की कोशिश की। कोरोनाकाल में चंपावत और टनकपुर में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाने से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देने के साथ चंपावत बस स्टेशन जैसे अनेक काम हुए। 
कैलाश चंद्र गहतोड़ी, भाजपा प्रत्याशी

भाजपा का पांच साल का कार्यकाल चंपावत के लिए विकास विहीन रहा। कांग्रेस के दौर के कार्यों पर ब्रेक लग गया। जिला अस्पताल को बेस अस्पताल के रूप में 2015 में प्रशासनिक मंजूरी मिली, लेकिन इस दिशा में भी एक कदम आगे नहीं बढ़ा जा सका। 
-हेमेश खर्कवाल, कांग्रेस प्रत्याशी

आम आदमी पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता लोगों को बुनियादी सुविधाएं दिलाना है। बिजली और पानी की निशुल्क व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा की सरकारी व्यवस्था को पटरी पर लाकर आम आदमी को लाभ पहुंचाने की गारंटी के साथ पार्टी जनता के बीच है। 
-मदन सिंह महर, आप प्रत्याशी

मुद्दों से दूर हैं सियासी दल
नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करना, औद्योगिक विकास, पूर्णागिरि रज्जूमार्ग, टनकपुर-जौलजीबी सड़क, चंपावत में बाईपास, ट्रंचिंग ग्राउंड, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार सहित अनेक मुद्दे हैं। 

चंपावत सीट से प्रत्याशी
भाजपा : कैलाश चंद्र गहतोड़ी
कांग्रेस : हेमेश खर्कवाल 
आप : मदन सिंह महर

सीट का इतिहास 
2002 में कांग्रेस के हेमेश खर्कवाल, 2007 में भाजपा के बीना महराना, 2012 में कांग्रेस के हेमेश खर्कवाल, 2017 में भाजपा के कैलाश चंद्र गहतोड़ी विधायक चुने गए। 

कुल वोटर : 96016 
पुरुष : 50057 
महिलाएं : 45959 
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