जिस दिन कैबिनेट, उसी दिन प्रस्ताव
मुख्य सचिव के पत्र के मुताबिक, अधिकांश विभाग मंत्रिमंडल की बैठक से ठीक पूर्व उसी दिन अथवा बैठक के दौरान बिना परामर्शी विभागों की सहमति और सलाह प्राप्त किए प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रस्ताव देरी से प्राप्त होने के कारण उनका ठीक से परीक्षण किया जाना संभव नहीं हो पाता है। इससे प्रस्तावों को मंत्रिमंडल के समक्ष रखे जाने के लिए मुख्यमंत्री से स्वीकृति प्राप्त होने में कठिनाई होती है।
सीएम और मंत्री भी जता चुके हैं आपत्ति
बैठक से ठीक पहले हड़बड़ी में प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने पर मुख्यमंत्री और मंत्री तक कई बार आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। बैठक में जाने से पहले उन्हें कुछ प्रस्तावों के बारे में जानकारी तक नहीं होती, जिससे इन पर फैसला लेने में दुविधा होती है। मुख्य सचिव ने अपने पत्र में सीएम और मंत्रियों की आपत्ति का जिक्र किया है।