फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'जल्द मिलेगी सीएम के 'कड़वी दवा' की पहली डोज'

Mon, 04 Aug 2014 09:38 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके कार्यालय से इन दिनों लगातार कड़े कदम और कड़वी दवा शब्द का प्रयोग हो रहा है।
विज्ञापन


आखिर इन इशारों में क्या छुपा है जिसे खुलकर कहने से मुख्यमंत्री बच रहे हैं या फिर आंदोलनरत राज्य की प्रतिक्रिया के चलते टोह ले रहे हैं।

आमतौर पर साफगोई से अपनी बात रखने वाले रावत को अब पत्रकारों से अनौपचारिक वार्ता का सहारा लेना पड़ रहा है। सीएम कहते हैं कि उत्तराखंड की जनता के हित में ऐसे फैसले लेने होंगे जो कड़वे हो सकते हैं। मुख्यमंत्री का फोकस स्वास्थ्य और शिक्षा पर है।

साफ है पहाड़ के उन स्कूलों को शिक्षक और अस्पतालों को चिकित्सक मिलेंगे जहां कोई जाना नहीं चाहता है अगर भेजा जाता है तो सिफारिशों से रुक जाता है।

सिफारिशी काम न करे

सूत्रों की मानें तो शिक्षकों और चिकित्सकों के तबादले को लेकर पॉलिसी तैयार हो रही है। जो सुनिश्चित करेगी कि पहाड़ के स्कूल और अस्पताल खाली न रहें।

बताते हैं कि तबादलों की तारीख भी इसीलिए बढ़ाई गई है ताकि ऐसी फूलप्रूफ पॉलिसी बने ताकि तबादला होने के बाद कोर्ट के किसी निर्देश से बचा जाए। साथ ही नियमों की परिधि में आने वाले की सिफारिश का काम न करे।

हालांकि स्वास्थ्य और अन्य कारणों से सहानुभूति का दृष्टिकोण काम करेगा। मुख्यमंत्री कहते हैं कि ये निर्णय अभी नहीं लिए गए तो आने वाले चार पांच वर्षों में राज्य की स्थिति चिंताजनक हो सकती है।

राज्य के संसाधन सीमित हैं। यदि विकास किया जाना है तो राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के साथ शासन और प्रशासन को रिजल्ट ओरिएंटेड बनाने पर विशेष ध्यान देना होगा। हमें यह समझना होगा कि जितना हम राज्य से प्राप्त कर रहे हैं उतना प्रतिफल भी राज्य को बदले में दें। मुख्यमंत्री कहते हैं कि मैं स्वयं डाक्टरों के मना करने के बावजूद दिन रात मेहनत कर रहा हूं क्योंकि समय व्यर्थ नष्ट नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन

कड़े कदम, कड़वी दवा

मुख्यमंत्री हरीश रावत के कड़े कदम और कड़वी दवा का असर दिखने लगा है मुख्य सचिव ने सचिवों पर कड़ाई शुरू कर दी है। मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने उन प्रमुख सचिवों को हिदायत दी है जो पिछले साल अपने कार्यालयों से जिलों के भ्रमण पर कम निकले थे।

मुख्य सचिव की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ऐसे सचिवों की वर्ष 2013-14 की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि अंकन(एसीआर) में इसका संज्ञान लिया जा रहा है।

उन्होंने निर्देश हैं कि अगले दो सप्ताह में अपने क्षेत्र भ्रमण के सम्बंध में की गई कार्यवाही के विवरण सम्बंधी अपनी टिप्पणी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय को उपलब्ध करायें।

मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिव, सभी प्रमुख सचिव, सचिव, प्रभारी सचिवों को निर्देश दिए हैं कि इस वर्ष भी वे जनपदों का भ्रमण कर विभागीय कार्यों का निरीक्षण और सत्यापन करें।

जिस जनपद का उन्हें प्रभारी बनाया गया है, उस जनपद के अधिकारियों के साथ बैठक करें। यदि किसी जनपद में उनके विभाग से सम्बंधित कोई कठिनाई है, तो मुख्यालय आकर उसका समाधान करें।

उनका कहना है कि गत वर्ष जिन अधिकारियों ने अपने जनपद भ्रमण की रिपोर्ट दी हैं, उनमें कुछ का कार्य बहुत अच्छा है। कुछ प्रमुख सचिवों द्वारा कम भ्रमण या कम निरीक्षण किया गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें