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चमोली आपदाः रैणी और तपोवन में 20वें दिन भी लापता लोगों की खोज जारी, तस्वीरों में देखें सुरंग के अंदर के हालात

Fri, 26 Feb 2021 12:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ
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सुरंग में मौजूद टीम - फोटो : अमर उजाला
चमोली आपदा के 20वें दिन भी रैणी और तपोवन क्षेत्र में मलबा हटाने और लोगों की खोज का अभियान जारी है। बैराज साइट और सुरंग से मलबा हटाने का कार्य शुक्रवार को भी जारी है। गुरुवार को भी यहां कोई शव नहीं मिला है। सुरंग के पीछे से लगातार मलबा आ रहा है और पानी का रिसाव हो रहा है। जिससे काम करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक आपदा में मारे गए 70 लोगों के शव और 30 मानव अंग बरामद हो चुके हैं। इनमें 40 की पहचान हुई है। जिनकी शिनाख्त नहीं हुई है, उनके डीएनए सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं। वहीं मलबा साफ करने वाले कर्मचारी सुरंग में एसएफटी के समीप तक पहुंच चुके हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखकर आगे बढ़ा जा रहा है। बैराज साइट पर धौली नदी में भारी विशाल पत्थर को तोड़ने के लिए ब्लास्ट किया जा रहा है, जिससे पानी का प्रभाव बैराज की तरफ न हो। पिछले तीन दिनों से अभी तक कोई भी शव नहीं मिला है। तपोवन रैणी आपदा में मृतक एक व्यक्ति के अस्थि कलश को पुलिस ने परिजनों के सुपुर्द किया। कर्णप्रयाग से पूर्व में बरामद एक शव की शिनाख्त दीपक शर्मा पुत्र प्रताप शर्मा निवासी फरीदाबाद हरियाणा के रूप में हुई थी।
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सुरंग में मौजूद टीम - फोटो : अमर उजाला
एसएसआई नरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि आपदा में लापता हुए दीपक शर्मा के शव की शिनाख्त न होने पर 11 फरवरी को कर्णप्रयाग में विधि विधान से दाह संस्कार करने के बाद अस्थियों को सुरक्षित रखा गया था। मृतक के परिजनों की ओर से शिनाख्त किए जाने के बाद अस्थि कलश परिजनों को सौंपा गया। 
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सुरंग में मौजूद टीम - फोटो : अमर उजाला
राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने उत्तराखंड सरकार की आपदा प्रबंधन नीति पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 2013 की केदारनाथ आपदा से सबक लिया होता तो रैणी आपदा में कई निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन केंद्रीय कैबिनेट सचिव बीके चतुर्वेदी की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट और आपदा से निपटने की संस्तुतियों को यदि भाजपा सरकार ने दबाया न होता, तो आज रैणी-तपोवन आपदा से निपटने में आसानी होती। 

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सुरंग में मौजूद टीम - फोटो : अमर उजाला
टम्टा ने कहा कि आपदा से निपटने के लिए सरकारों के पास कोई कारगर नीति नहीं है। विरोध के बावजूद बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को क्यों मंजूरी दी जाती है। बड़े बांधों के कारण आने वाली आपदाओं से निपटने को मशीनें नहीं है। सांसद ने कहा कि तत्कालीन केंद्रीय कैबिनेट सचिव बीके चतुर्वेदी की अध्यक्षता में 2013 के बाद आपदा से निपटने के लिए तैयार की गई रिपोर्ट में आपदा से निपटने के तरीके, तकनीकी, वित्तीय सपोर्ट की सिफारिशें थी, लेकिन उस पर कोई अमल नहीं हुआ।
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सुरंग में मौजूद टीम - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार ने इन सिफारिशों को दबा दिया। रिपोर्ट में हिमालयी राज्यों के लिए तमाम परियोजनाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ग्रीन बोनस देने की व्यवस्था थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। रैणी गांव के नीचे हो रहे विस्फोटों, प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण ऊपरी क्षेत्र में हुई हलचल से आपदा आई है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष राकेश राणा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट, महिला कांग्रेस अध्यक्ष दर्शनी रावत राजेंद्र डोभाल आदि मौजूद थे। 
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