भाजपा से उन्होंने उम्मीदें भी कुछ ज्यादा ही पाल लीं। लेकिन भाजपा की अपनी कार्यशैली और संस्कृति है। कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के बाद भी हरक सिंह को भाजपा का कुनबे मेें बहुत अपनापन महसूस नहीं हुआ।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से हरक की खबरें लगातार सतह पर आती रहीं। कर्मकार बोर्ड में नियुक्तियों और कामकाज की शैली को लेकर त्रिवेंद्र सिंह रावत से हरक सिंह रावत की खूब ठनी। एकबारगी तो ऐसा लगा कि त्रिवेंद्र ने उनके ऊपर अंकुश लगा दिया है। पूरा कर्मकार बोर्ड, उसका दफ्तर, उसकी बहुचर्चित सचिव सब बदल गया। इससे पहले यह लड़ाई आगे बढ़ती अपने शासन काल के चौथे साल खत्म होते-होते त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुख्यमंत्री पद से विदाई हो गई।
इसके बाद हरक सिंह को उम्मीद जगी कि भाजपा उनकी वरिष्ठता और राजनीतिक कौशल को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद से नवाजेगी। कुछ अन्य दावेदार भी थे। लेकिन भाजपा ने अपनी अनूठी कार्यशैली से सांसद तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बना दिया। अलबेले बयानों से चर्चा में आए तीरथ को भी भाजपा ने बहुत जल्द मुख्यमंत्री की गद्दी से उतार दिया। एक बार फिर हरक को उम्मीद बंधी लेकिन सेहरा पुष्कर सिंह धामी के सिर पर बंधा। हरक फिर नाराज हुए।
हरक बीच कैबिनेट बैठक नाराज हो गए
नए सीएम धामी को उन्हें मनाने के लिए शपथ ग्रहण के तत्काल बाद उनके घर तक जाना पड़ा। लेकिन दिल में कसक लिए हरक दिल्ली दरबार तक गए। वहां भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें पता नहीं कौन सी घुट्टी पिलाई कि वह फौरी तौर पर मान गए। कैबिनेट और दूसरी बैठकों के बीच में मुख्यमंत्री धामी की कनिष्ठता और हरक की वरिष्ठता पर भी खूब चर्चाएं हुईं। तात्कालिक तौर पर तो कोई ऐसी बात नहीं हुई लेकिन जब प्रदेश में चुनाव दस्तक दे रहे हैं तो हरक बीच कैबिनेट बैठक नाराज हो गए। हरक सिंह की नाराजगी की टाइमिंग भी सियासी पंडितों के बीच खासी चर्चा बटोरती है।
वह जब भी रूठते रहे हैं तो अक्सर दूसरों दलों के लोग उन्हें मनाकर ले जाते हैं। एक बार फिर वह नाजुक समय पर रूठे हैं। इस वक्त उन्हें कौन मनाएगा... भाजपा या कांग्रेस अथवा कोई दूसरा दल, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन यह याद रखना भी जरूरी है कि हरक सिंह रावत का कांग्रेस के वरिष्ठ रावत (हरीश) रावत से छत्तीस का आंकड़ा है। लेकिन सियासत में न कोई स्थायी दोस्त होता है न कोई स्थायी दुश्मन। इस मुहावरे को हरक हमेशा सच का जामा पहनाते रहे हैं। उनका अगला कदम बताएगा कि उनके रूठे कदम कहां रुकते हैं।