नई खनन नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। नई खनन नीति से जहां अवैध खनन पर अंकुश लगने की संभावना है वहीं सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी। सरकार ने गन्ना मिलों को राहत देते हुए उन्हें मदद करने को कहा है।
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सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सरकार ने मंजूरी दे दी। अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए नई खनन नीति को मंजूरी मिल गई। नई नीति के तहत अब काफी बदलाव की संभावना है। खनन के हिसाब से प्रदेश को तीन जोन में बांटने का निर्णय लिया गया है।
सचिवालय में मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी मुख्य सचिव एन रविशंकर के अलावा अपर मुख सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव कृषि एस रामास्वामी ने भी दी। अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने बताया कि खनन नीति में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। नई खनन नीति से जहां अवैध खनन पर अंकुश लगने की संभावना है वहीं सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी।
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जानिए, यह है नई खनन नीति की खास बातें
नई नीति के तहत खनन के हिसाब से प्रदेश को तीन जोन में बांटने का निर्णय लिया गया है। स्टोन क्रशर लगाने के लिए जोन ए में 2 लाख, जोन बी में 4 लाख और जोन सी में 10 लाख रुपये शुल्क कर किया गया है। इसके अलावा भंडारण नीति में भी बदलाव किया गया है। भंडारण की अनुमति पहले डीएम स्तर से मिल जाती थी, अब शासन से इसकी अनुमति लेनी होगी।
भंडारण की अनुमति अब उसे ही मिलेगी जिसके पास खनन का पट्टा होगा या फिर स्टोन क्रशर की अनुमति होगी। रिवर बैक मैटेरियल (आरबीएम) को लेकर भी शासन ने बदलाव किया है। अब इसे घन मीटर में नहीं मापा जाएगा बल्कि टन में इसका वजन होगा।
90 रुपये से 200 रुपये हुआ शुल्क आरबीएम के शुल्क में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। यह 90 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। इससे सरकार का राजस्व दोगुना होने का अनुमान है।
खड़िया को उप खनिज में किया गया शामिल
खनिज में शामिल खड़िया को अब उप खनिज में शामिल किया गया है। इसका फायदा यह मिलेगा कि खड़िया को लेकर प्रदेश सरकार अपनी नीति बना सकती है। इसकी मांग लंबे समय से उठ रही थी। इसके लिए जमा होने वाली राशि में वृद्धि की गई है। आवेदन शुल्क पहले 50 हजार रुपये थे अब पांच लाख रुपये कर दिया गया है।
साथ ही रिवर बैक मैटेरियल के लिए जो प्रक्रिया थी वही प्रक्रिया अब खड़िया के लिए भी कर दी गई है। सरकारी निर्माण विभाग को मोबाइल क्रशर लगाने की अनुमति भी दे दी गई है। स्टोन क्रशर का आवंटन अब लाटरी व्यवस्था के आधार पर होगा।
गन्ना किसानों को राहत प्रदेश में गन्ना मिलों को अभी 89 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को करना है। 30 जून तक भुगतान करने के संबंध में केंद्र सरकार को प्रमाण पत्र देने हैं। इसके बाद केंद्रीय पैकेज मिलेगा। इसे देखते कैबिनेट बकाया मूल्य के भुगतान का अनुमति दे दी है। अब मंगलवार को चीनी मिलें केंद्र सरकार को प्रमाण पत्र भेज देगी।
प्रोडक्शन बोनस देगी सरकार, जानिए कितना
कैबिनेट बैठक के बाद बताया गया कि रामदाना, मंडुआ की खेती करने वालों को प्रोडक्शन बोनस 200 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाएगा। सोमवार को माल्टा और गलगल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है।
बे-मौसमी सब्जी पर होने खर्च पर 75 प्रतिशत की सब्सिडी, रमसा में 1800 लैब तकनीशियन के नए पद सृजित करने और राज्य आंदोलनकारियों को नौकरी में आरक्षण को लेकर उपसमिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया। प्रमुख सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में यह कमेटी गठित की जाएगी।
इसके अलावा चारधाम वाले पहाड़ी क्षेत्र में एक साल के लिए मनोरंजन कर और लग्जरी कर में मिली छूट की सीमा भी बढ़ा दी गई है। साथ ही मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी की सीमा 2020 तक कर दी गई है।
-प्रदेश के स्थानीय चीनी बाजार को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिए राज्य में बाहर से आने वाली चीनी पर 11 प्रतिशत एंट्री टैक्स लगाने को मंजूरी। - कैबिनेट ने परिवहन विभाग को 590 नई बसों की खरीद की अनुमति दी है। ये बसे नाबार्ड से सौ करोड़ रुपये का अनुदान लेकर खरीदी जाएंगी। इस पर ब्याज का भुगतान सरकार करेगी। - पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मंडुआ, रामदाना, गहथ, मक्का आदि के प्रमाणिक बीजों पर 75 प्रतिशत अनुदान। इसके लिए किसानों के समूह भी बनाए जाएंगे।
- मंत्रिमंडल की बैठक में वाटर बोनस पर भी चर्चा हुई। इसकी दरों को निर्धारित करने के लिए समिति के गठन को मंजूरी दी गई। -18 साल तक के विकलांग बच्चों को आर्थिक सहायता 500 रुपये प्रति माह स्वीकृत की गई। बौने लोगों के लिए आर्थिक सहायता 800 रुपये तक की गई। मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के परिजनों को अब कुल 1200 रुपये की सहायता मिलेगी। परित्यक्ता महिलाओं को अब स्व प्रमाणित करना होगा। -नानकमत्ता और गूलरभोज को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया। रानीखेत और चिडियानौला को मिलाकर पालिका बनाने की मंजूरी दी गई।
- टिहरी में मदननेगी को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए सिडकुल को 18 हेक्टेयर जमीन दी गई। - दून में आईआईएम काशीपुर के सेटेलाइट कैंपस के लिए निशुल्क भूमि दी जाएगी। - सोमेश्वर, तुंग नाखुरी और नाचनी में उप कोषागार बनेगा - प्रदेश में अब रोपवे पर टैक्स लगेगा। - ई स्टेपिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर सहमति