उत्तराखंड में तबादला सीजन शुरू होते ही सुगम की चाह रखने वाले कागजों पर खुद को बीमार दिखाने में लगे हैं। इसके लिए प्रमाण पत्र अस्पतालों और मेडिकल बोर्ड से भी ला रहे हैं। कोई संशय नहीं कि इसमें खूब खेल होता है।
हाल में शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के चिकित्सा प्रमाणपत्र पर सवाल उठे तो हंगामा हो गया। इसे देखते हुए जहां मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों में सख्ती की बात कही तो चिकित्सा मंत्री ने स्टेट मेडिकल बोर्ड को ही भंग करने की चेतावनी दे दी। सरकार के तेवर से लगता है कि इस बार बहाने की बीमारी नहीं चलेगी।
चिकित्सा प्रमाण पत्रों वाले आवेदनों की हो जांच: सीएम
अब तबादलों में बहाने की बीमारी नहीं चलेगी। बीमारी का चिकित्सा प्रमाण पत्र लगाकर दुर्गम से सुगम में तैनाती का प्रतिवेदन देने वालों के दस्तावेजों की जांच होगी। जांच में प्रमाण पत्रों में गलती होने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। यह कहना है मुख्यमंत्री हरीश रावत का।
रकारी कार्मिकों के पहाड़ पर अपनी सेवा देने में आनाकानी के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में सीएम हरीश रावत ने पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती से बचने के लिए चिकित्सा प्रमाण पत्रों का सहारा लेने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायत आती रहती है कि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती से बचने के लिए कुछ कार्मिक अपना या फिर अपने परिजनों की बीमारी का बहाना बनाकर चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने सुगम क्षेत्रों में तैनाती के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले चिकित्सा प्रमाण पत्रों की सक्षम स्तर से जांच कराने के निर्देश मुख्य सचिव को दिए हैं। यदि जांच में चिकित्सा प्रमाण पत्र गलत पाए जाते हैं तो कार्मिकों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।