चारधाम आलवेदर रोड और प्रदेश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर सरकारी भूमि के अवैध कब्जाधारियों को सरकार ने राहत दी है। उन्हें उनके कब्जे की भूमि पर बनाए गए प्रतिष्ठान व घर का मुआवजा पाने के लिए शपथ पत्र नहीं देना होगा।
साथ ही उन्हें कब्जे की भूमि पर बनाए गए मकान या दुकान की कुल लागत का 10 फीसदी मुआवजा मिलेगा। बृहस्पतिवार को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में आए इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। सरकार के इस फैसले से सैकड़ों कब्जाधारी लाभान्वित होंगे।
अकेले चारधाम आलवेदर रोड परियोजना में ऐसे 250 से अधिक प्रभावितों को इससे लाभ होगा। प्रदेश सरकार ने अवैध कब्जाधारियों को मुआवजा राशि देने का फैसला किया था। इसके तहत कब्जाधारी पर यह शर्त लागू थी कि उसके पास किसी अन्य स्थान पर कोई दुकान या भवन नहीं है। प्रभावित लोगों ने सरकार से इस शर्त को हटाने का अनुरोध किया था। इस पर प्रदेश मंत्रिमंडल ने शपथ पत्र से छूट दे दी है। अब कब्जाधारियों को कब्जे की भूमि पर बने मकान या दुकान की कुल लागत का 10 प्रतिशत मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
प्रदेश में पहली बार अप्रैल में आयोजित हो रहे वेलनेस समिट के लिए सरकार ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) को नेशनल पार्टनर बनाया है। बृहस्पतिवार को कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी।
त्रिवेंद्र सरकार ने आयुर्वेद, योग, पर्यटन और मेडिकल सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एनआईएचएम) 16 व 17 अप्रैल को दो दिवसीय वेलनेस समिट प्रस्तावित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समिट का उद्घाटन करेंगे, लेकिन पीएमओ से अभी कार्यक्रम के लिए तारीख तय होना बाकी है। सीआईआई को पार्टनर बनाने से अब समिट की तैयारियों में तेजी आएगी।
वेलनेस समिट के लिए सीआईआई के माध्यम से देश दुनिया के बड़े निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सीआईआई के सहयोग से समिट से पहले दिल्ली, कोच्चि व मुंबई में रोड शो किया जाएगा। सरकार का मानना है कि राज्य में आयुष, योग, पर्यटन व मेडिकल सेक्टर में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। इन सेक्टरों में निवेश होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
देहरादून में केदारपुरी पुनर्निर्माण के कार्यों में आर्किटेक्ट की सेवाओं के लिए कंसलटेंसी फीस सरकार ने तय कर दी है। जिसके अनुसार परियोजना लागत का दो प्रतिशत संबंधित कंपनी को बतौर कंसलटेंसी फीस के रूप में दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को इसे मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।
वर्ष 2013 की आपदा से हुए भारी नुकसान के बाद केदारपुरी में विभिन्न निर्माण कार्य किए जा रहेहैं। प्रथम चरण में केदारपुरी पुनर्निर्माण के लिए जेएसडब्ल्यू कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिसमें कंपनी ने आर्किटेक्ट कंसलटेंसी कंपनी आईएनआई को 3.2 प्रतिशत की दर से आर्किटेक्ट फीस दी थी।
अब द्वितीय चरण के कार्यों की शुरूआत होनी जा रही है। इसके तरह सरकार ने निर्माण कार्यों के लिए केदारनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया है। साथ ही पुनर्निर्माण कार्यों के लिए ट्रस्ट को 150 करोड़ की धनराशि जारी की है। वर्ष 2008 के वित्त विभाग के शासनादेश में आउटसोर्स से आर्किटेक्ट की सेवाएं लेने पर परियोजना लागत का दो प्रतिशत कंसलटेंसी फीस तय की गई थी। इसके अनुसार ही सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड से दूसरे चरण में होने वाले निर्माण कार्यों के लिए आईएनआई डिजाइन कंपनी से दो प्रतिशत फीस पर कंसलटेंसी सेवाएं ली जाएगी।
शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आसानी से मिलेगी जमीन
त्रिवेंद्र सरकार ने जिला विकास प्राधिकरणों के तहत मास्टर प्लान वाले क्षेत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन अनुमति की प्रक्रिया को आसान कर दिया है। जिन क्षेत्रों में मास्टर प्लान लागू है, वहां जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 143 की व्यवस्था को समाप्त कर कृषि भूमि को अकृषि कराने की प्रक्रिया को सरल कर दिया है।
जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 143 में कृषि जोत की भूमि पर आवास या उद्योग लगाने के लिए अनुमति की जटिल प्रक्रिया थी। इस कारण विकास योजनाओं व उद्योगों के लिए जमीन नहीं मिल रही थी। बृहस्पतिवार को कैबिनेट ने विकास प्राधिकरणों के मास्टर प्लान क्षेत्रों में धारा 143 को समाप्त करने की मंजूरी दी है। इससे उद्योगों व अन्य विकास योजनाओं के लिए आसानी से भूमि उपलब्ध हो सकेगी।