कर्मियों के मुताबिक कार्यशाला में बसों की सही से मरम्मत नहीं की जा रही है। कार्यशाला के रजिस्टर में ओके लिखकर बस को मार्ग पर भेजा जाता है। चालकों की बात को अनसुना कर दिया जाता है। चार महीने पहले भी इसी बस में दिल्ली जाते समय मुरादाबाद में ही बायीं साइड का टायर निकल गया था। तब भी यात्री बाल-बाल बचे थे। डिपो में करीब 44 बसों का बेड़ा है।
समय से नहीं मिल रहे पार्ट्स
कार्यशाला प्रभारी लखपत सिंह ने बताया कि 60 हजार किमी चलने के बाद बस के आगे के टायर नए लगाए जाते हैं। एक दिन में बस करीब 12 सौ किमी चलती है। दिल्ली मार्ग की बस संख्या यूके 07पीए 1985 इंजन में तकनीकी खामियों के कारण 18 जनवरी, इसी मार्ग की बस संख्या यूके 07पीए 1472 में फ्यूल पंप खराब होने के कारण बुधवार से खड़ी है। बसों को सही से चेक किया जाता है। एडवांस में गाड़ियों के पार्ट्स नहीं मिलते हैं। डिमांड के मुताबिक पर्याप्त टायर नहीं मिल पाते हैं। काठगोदाम से 28 जनवरी को छह के स्थान पर दो ही टायर मिले हैं।
मुरादाबाद में बस का टायर निकलने की जानकारी नहीं है। जानकारी कर मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
-यशपाल सिंह, महाप्रबंधक, परिवहन निगम