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सरकार ने सभी को दिया नए साल का तोहफा

Thu, 09 Jan 2014 10:22 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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बुधवार को देर शाम देहरादून में हुई कैबिनेट में सरकार ने कई लोक लुभावन फैसले किए। लोकसभा चुनाव को देखते हुए फैसले में सभी वर्ग को लुभाने की कोशिश की गई है।
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मलिन बस्तियों को नियमित करने का फैसला
एक ओर जहां विवादों में आए सेवा के अधिकार कानून के ढांचे को मंजूरी दी गई वहीं वीरता पदक के लिए सम्मान राशि में भी इजाफा किया गया है।

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कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल मलिन बस्तियों को नियमित करने की तरफ भी एक कदम आगे बढ़ाया गया और वर्ष 2000 के सर्किल रेट के आधार पर इन बस्तियों को नियमित करने का फैसला किया गया। इसके अलावा करीब डेढ़ दर्जन मामलों में कैबिनेट ने फैसले किए गए।

करीब दो घंटे चली बैठक में सरकार ने प्रत्येक वर्ग को छूने की कोशिश की। लंबे समय से असंतुष्ट चल रहे डाक्टरों को भी तवज्जो दी गई। डॉक्टर 11 जनवरी से हड़ताल पर जाने को आमादा थे। पुलिस कर्मियों को 30 प्रतिशत भत्ता भी पुरानी मांग मान लेने वाला साबित हुआ।
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इसी तरह पंचायत और लोक सभा चुनाव के मुहाने पर खड़ी सरकार ने पूर्व सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने की भी कोशिश की है। वीरता पदकों की सम्मान राशि में खासा इजाफा करने का फैसला किया गया। एनएचआरएम में बीपीएल को निशुल्क उपचार की सुविधा मिलती थी।

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सरकार ने बुधवार को कैबिनेट में इस दायरे में एपीएल को भी शामिल करने का फैसला किया। सबको लुभाने की कोशिश में वृद्धावस्था, विधवा और विकलांग पेंशन को बढ़ा दिया गया। सेवा के अधिकार कानून को अमलीजामा पहनाने का दावा सरकार कर रही है।

इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए सेवा के अधिकार कानून के ढांचे को मंजूरी दे दी गई।

चुनाव से पहले घोषणा पत्र की आई याद
चुनाव से ठीक पहले प्रदेश सरकार को यह भी याद आया कि घोषणा पत्र में किए गए वादे भी पूरे किए जाने हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव से लेकर सितारगंज के उपचुनाव में मलिन बस्तियों को नियमित करने का सरकार का दावा खूब उछला था।

कैबिनेट में मलिन बस्तियों को वर्ष 2000 के सर्किल रेट पर नियमित करने का फैसला किया गया। शहरी निकाय के एक सर्वे के मुताबिक प्रदेश में करीब 543 मलिन बस्तियां हैं। हालांकि सरकार का यह फैसला घोषणा को पूरी करने वाला शायद ही साबित हो पाए।

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कारण यह भी है कि देहरादून जैसे शहरों में मलिन बस्तियों में ही मॉल और शापिंग काम्प्लेक्स तक बने हुए हैं और इनके मालिकाना हक को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अब सरकार को बढ़े पैमाने पर निर्माण कार्य पर भी उतरना है।

लिहाजा पहले से प्रचलित शेड्यूल रेट में भी परिवर्तन होने से निर्माण कार्य की लागत कम होने का अनुमान है।

कैबिनेट के फैसले
- सेवा का अधिकार कानून को मंजूरी। कानून को लागू करने के लिए ढांचा तैयार होगा और अलग से आयोग बनेगा। सरकार ढांचे को सदन के पटल पर रखेगी।
- नौ नवंबर 2000 के सर्किल रेट पर नियमित की जाएंगी प्रदेश की मलिन बस्तियां। मलिन बस्तियों का सर्वे जल्द ही
कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।

- परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र आदि सैन्य वीरता पदकों के लिए मिलने वाली सम्मान राशि में इजाफे के मंजूरी। उत्तराखंड देश में सबसे अधिक सम्मान राशि देने वाला राज्य बन गया।
- सैनिक कल्याण के ब्लॉक प्रतिनिधि के मानदेय को 4000 से बढ़ाकर 5000 रुपए किया। अलग से एक हजार रुपये के यात्रा भत्ते को भी मंजूरी।

- स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञों और डाक्टरों का एक ही कैडर करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी। इनका अब सिंगल कैडर हो गया है।
- एनआरएचएम में एपीएल के लिए निशुल्क उपचार और दवा उपलब्ध कराने को भी मंजूरी अंतर जातीय विवाह करने पर महिला को एक हजार रुपए का प्रोत्साहन भत्ता, मेडल और प्रमाण पत्र भी।

अन्य फैसले
- वर्ष के पहले सत्र के लिए राज्यपाल के अभिभाषण पर कैबिनेट ने सहमति दी।
- मानवाधिकार आयोग के ढांचे को मंजूरी। आयोग में अब 47 पद होंगे जिसमें पुलिस महानिरीक्षक, निबंधक विधि आदि का पद भी शामिल हैं।

- अभिसूचना एवं सुरक्षा इकाई के पुलिस कर्मियों को 30 प्रतिशत प्रोत्साहन भत्ता। यह मुख्यमंत्री की घोषणा थी।
- वृद्ध, विधवा, विकलांग पेंशन को एकमुश्त बढ़ाक र 800 रुपये कर दिया गया। पहले यह कैटेगरी के हिसाब से 600 और 400 रुपए था।

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- पंतनगर विश्वविद्यालय के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 साल करने का एक्ट में प्रावधान करने को कैबिनेट की मंजूरी। पहले यह आयु 62 साल थी।
- उत्तराखंड हेमवतीनंदन मेडिकल चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के ढांचे को सदन के पटल पर रखा जाएगा।
- दुग्ध डेयरियों को उचित मात्रा में और कम रेट पर शीरा उपलब्ध कराया जाएगा।

- शिवालिक नगर, भगवानपुर, ढालवाला, घनसाली, बेरीनाग, सतपुली, वनबसा को नगर पंचायत का दर्जा।
- निर्माण कार्यों के लिए सीपीडब्ल्यूडी की तर्ज पर शेड्यूल रेट को मंजूरी। कैबिनेट ने माना कि लोक निर्माण विभाग के प्रदेश में शेड्यूल रेट अधिक हैं। इससे निर्माण लागत में कमी आएगी।
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- चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली को मंजूरी।
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