किसी शहर में सेटल होने की सोच रहे हैं तो देहरादून एक बेहतर विकल्प हो सकता है। बेहतर शैक्षिक माहौल के साथ यहां
नागरिक सुरक्षा और रोजगार के मामले में लखनऊ और श्रीनगर से बेहतर हालात हैं।
दून को मिला 22वां स्थान
गुड़गांव स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ काम्पिटीटिवनेस की ‘लाइवेबिलिटी इंडेक्स 2013’ रिपोर्ट में यह बात फिर साबित हुई है। इस सूचकांक में शामिल देश के 50 शहरों में दून को 22वां स्थान मिला है।
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रहने योग्य सूचकांक को रहने के लिए बेहतर माहौल, सुविधा और परिस्थितियों के लिहाज से तैयार किया गया है। सूचकांक में मुंबई को पहला, चेन्नई को दूसरा और तीसरा स्थान हैदराबाद को मिला है।
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बंगलूरू चौथे, दिल्ली पांचवें, कोलकाता छठे, नोएडा सातवें, गुड़गांव आठवें, चंडीगढ़ नौवें और मदुरै दसवें स्थान पर है। सूचकांक की खास बात यह है कि देहरादून को सभी पैमानों पर लखनऊ और श्रीनगर जैसे शहरों से ऊपर माना गया है। संस्थान की ओर से हर साल यह रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है।
विश्वस्तरीय मॉडल की तर्ज पर सूचकांक
यह सूचकांक विश्वस्तरीय माइकल ई-पोर्टर के डायमंड मॉडल की तर्ज पर किया गया है। इंडेक्स का यह प्रारूप हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से तैयार हुआ है। सर्वेक्षण के आठ मुख्य पैमाने लिए गए हैं।
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जनसांख्यिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य एंड चिकित्सा मानक, सुरक्षा, हाउसिंग विकल्प, सामाजिक-सांस्कृतिक-प्राकृतिक माहौल, आर्थिक माहौल और सुनियोजित माहौल।
इन मुख्य पैमानों के अलावा 20 अन्य तथ्यों जैसे गुणवत्ता परक शिक्षा व चिकित्सा संस्थान, रोजगार, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का तुलनात्मक अध्ययन को भी सूचकांक में शामिल किया गया है।
पटना और कानपुर अंतिम स्थान पर
रहने योग्य सूचकांक में फरीदाबाद को 45वां, आगरा को 46वां, रायपुर को 47वां, आसनसोल को 48वां, कानपुर को 49वां और पटना को 50वां स्थान दिया गया है। यानी यह शहर लाइवेबिलिटी के नजरिए से काफी अच्छे नहीं हैं।
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सूची में लखनऊ को 28वां, इलाहाबाद को 29वां, जम्मू को 30वां, अमृतसर को 31वां, वाराणसी को 33वां, लुधियाना को 34वां, श्रीनगर को 35वां, मेरठ को 38वां, रांची को 42वां स्थान मिला है।