आयुर्वेद विश्वविद्यालय के घोटाले में क्रय समिति में शामिल पांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। विजिलेंस ने जांच के बाद इनकी भूमिका संदिग्ध मानते हुए शासन से कार्रवाई की अनुमति मांगी है। इस मामले में पूर्व कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा और उनकी दो फर्म पार्टनर जेल में बंद है।
विजिलेंस की खुली जांच में एक करोड़ के करीब का घोटाला उजागर होने के बाद पूर्व कुल सचिव मृत्युंजय मिश्रा, उसकी पत्नी श्वेता मिश्रा, फर्म पार्टनर शिल्पा त्यागी, नूतन रावत और मिश्रा के चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी आधार पर विजिलेंस ने नवंबर माह में मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि फर्म पार्टनर शिल्पा त्यागी और नूतन रावत को बाद में पकड़ा गया।
मिश्रा की पत्नी के खिलाफ विवेचना लंबित है। घोटाले की विवेचना के दौरान विवि की क्रय समिति में शामिल पांच अधिकारियों की भूमिका की संदिग्ध पाई गई है। इसी आधार पर विजिलेंस ने इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को शासन से अनुमति मांगी है। विजिलेंस के डीआईजी कृष्ण कुमार वीके ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शासन की अनुमति मिलने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।