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सिस्टम की खुली पोल: एवलांच और बस हादसे के बाद उठे सवाल, लापता लोगों के परिजनों को नहीं मिली सूचना

Thu, 06 Oct 2022 02:40 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र अपनी भूमिका का सही से नहीं निभा पा रहा है। उत्तरकाशी में हिमस्खलन की चपेट में आए लापता 28 लोगों के परिजनों को 24 घंटे बाद भी कोई सूचना शासन-प्रशासन या निम प्रशासन की ओर से नहीं दी गई।
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मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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आपदा की दृष्टि से संवेदनशील प्रदेश में जब भी कोई बड़ी विपदा आती है, लोगों का पहला ध्यान आपदा प्रबंधन विभाग की ओर जाता है। विभाग के पास सुरक्षा और बचाव के अलावा संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सही सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की जिम्मेदारी भी है। लेकिन उत्तराखंड में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (कंट्रोल रूम) अपनी इस भूमिका का सही से निवर्हन नहीं कर पा रहा है।

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प्रदेश में हुई दो बड़ी आपदाओं के बाद कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली है। कंट्रोल रूम में नियमित स्टाफ के अलावा शासन की ओर से प्रतिदिन तमाम लाइन विभागों के नोडल अधिकारियों की ड्यूटी तय रहती है। पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जता चुके हैं। 

लापता के परिजनों को 24 घंटे बाद भी नहीं दी गई सूचना 
उत्तरकाशी में हिमस्खलन की चपेट में आए लापता 28 लोगों के परिजनों को 24 घंटे बाद भी कोई सूचना शासन-प्रशासन या निम प्रशासन की ओर से नहीं दी गई। अमर उजाला ने लापता लोगों के परिजनों से एक-एक कर फोन पर बात की तो सभी ने इस बात की शिकायत दर्ज कराई। बुधवार को लापता लोगों के तमाम परिजन कोई देहरादून तो कोई उत्तरकाशी में अपनों की तलाश में भटकता रहा। उन्हें किसी ने भी सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। ऐसे में उत्तरकाशी के मातली पहुंचे सीएम धामी से भी लोगों ने अपनों के बारे में जानना चाहा। 

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कंट्रोल रूम के हर पन्ने के आंकड़ों में झोल 
हिमस्खलन की घटना में कितने लोग हताहत हुए, कितने लापता हैं, कितने किस स्थिति में हैं। इन बातों के सही जवाब न तो उत्तरकाशी जिला प्रशासन और न ही राज्य आपातकालीन कंट्रोल रूम दे पा रहा है। वहीं, पौड़ी की बस दुर्घटना में बुधवार शाम सवा सात बजे अपर जिलाधिकारी गढ़वाल इला गिरी ने 32 लोगों के मारे जाने की सूचना दी। राज्य कंट्रोल रूम की ओर से साढ़े आठ बजे के आसपास जो सूचना प्रेषित की गई, उसमें मृतकों की संख्या 19 बताई गई। इस तरह से मीडिया को भी सही जानकारी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे लोगों की बीच भ्रम की स्थिति बन रही है। 
 
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विपदा की घड़ी में भी मुश्किल से उठता है कंट्रोल रूम का फोन 
आपदा की स्थिति में हर कोई सूचनाओं के लिए सबसे पहले कंट्रोल रूम में ही फोन करता है। ऐसे में कई बार कंट्रोल रूम का फोन ही नहीं उठता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि कंट्रोल रूम में यूं तो बहुत सारे विभागों के नोडल कर्मचारियों-अधिकारियों की ड्यूटी रहती है, लेकिन यह लोग यहां काम क्या करते हैं, यह आज तक समझ नहीं आया। 

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निम ही बता पाएगा, कितने लोग हताहत हुए
हिमस्खलन की घटना में कितने लोग हताहत हुए, पूछने पर आपदा प्रबंधन सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा ने कहा कि यह जानकारी निम प्रशासन ही दे पाएगा। अभी रेस्क्यू अभियान चल रहा है। संभव है कि बृहस्पतिवार तक निम की ओर से इस संबंध में जानकारी उपलब्ध करा दी जाए।
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