बाजपुर में पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के काफिले पर हुए हमले के मुद्दे पर विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा काटा। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। कानून व्यवस्था पर लाए कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग करते हुए विपक्ष ने सरकार पर कई आरोप लगाए और वेल में आकर जोरदार नारेबाजी की। सरकार ने विपक्ष के सभी आरोपों की सिरे से खारिज किया और आपराधिक मामलों में कमी आने का दावा किया।
भोजनावकाश के बाद शुरू हुई सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने राज्य में कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने चार दिसंबर को बाजपुर में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके पुत्र पूर्व विधायक के काफिले पर हुए हमले का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा पुलिस स्टेशन से कुछ ही दूरी हुए इस हमले के बाद कानून व्यवस्था की पोल खुल गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्य आरोपी समेत 12 अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। मुख्य आरोपी पर पहले ही धारा 302 और छह अन्य मुकदमे बाजपुर में ही दर्ज हैं। ऐसे अपराधी की ओर से क्रास मुकदमा दर्ज कराया जाना, यह बताता है कि उसे राजनीति संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि राज्य में डकैती, लूट, वाहन लूट, चोरी और बलात्कार की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जो बताती है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।
विधायक गोविंद कुंजवाल ने कहा कि ऐसी घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने इस घटना में सरकार के शामिल होने का आरोप लगाया। वहीं, विधायक करण महरा ने इस हमले से एक दिन पहले पूर्व विधायक संजीव आर्य ने संबंधित व्यक्ति की ओर से कोई गड़बड़ किए जाने की शिकायत प्रशासन से की थी। उन्होंने बताया कि हमले के मुख्य आरोपी के खिलाफ 26 नवंबर को संबंधित थानाध्यक्ष की ओर जिलाधिकारी को पत्र लिखकर गुंडा एक्ट लगाने की अनुमति मांगी थी। थानाध्यक्ष ने अपने पत्र में आरोपी व्यक्ति से क्षेत्र की शांति को खतरा बताया था। विधायक आदेश चौहान ने कहा कि उस दिन भाजपा के तमाम कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल होने जा रहे थे। इसलिए सोची समझी साजिश के तहत यह हमला किया गया है। विधायक हरीश धामी ने कहा कि सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। विधायक ममता राकेश ने यशपाल आर्य को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की।
कार्यस्थगन पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने केदारनाथ विधायक मनोज रावत के साथ गुप्तकाशी में हेलीपैड पर हुई बदसलूकी का मुद्दा भी जोर शोर से उठाया। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा से पहले मुख्यमंत्री की ओर से स्थानीय विधायक होने के नाते मनोज रावत को आनन-फानन में केदारपुरी बुलाया गया। इस दौरान हेलीपैड पर पवन हंस कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों की ओर से उनके साथ न सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि मारपीट भी की गई।
विधायक मनोज रावत ने कहा कि पीएम की केदारनाथ यात्रा से पूर्व पंडा पुराहितों के दबाव में सरकार ने उन्हें बैठक का बुलावा तो भेज दिया, लेकिन सरकार चाहती ही नहीं थी कि वह इस बैठक में शामिल हों। उन्होंने आरोप केदारनाथ में हेली कंपनियां की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की अगर मंशा साफ होती तो उस दिन की घटना की सीसीटीवी फुटेज मांगाकर जांच की जाती। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उस दिन तमाम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तक छह फ्लाइट से केदारनाथ ले जाया गया। लेकिन उन्हें विधायक होने के बाद भी घंटों बैठाए रखा। उन्होंने इस विधायकों के विशेषाधिकार हनन का मामला बताया।
किसी वाहन का चालान निरस्त कराने को लेकर मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी नंदन सिंह बिष्ट की ओर से एसएसपी को लिखी गई चिट्ठी की चर्चा सदन में भी हुई। कानून व्यवस्था पर चर्चा के दौरान रानीखेत विधायक करण महरा ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में सीएम के पीआरओ की ओर से एसएसपी को लिखी गई चिट्ठी को बकायदा पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि जब एक चालान को निरस्त कराने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को चिट्ठी लिखनी पढ़ रही है, ऐसे प्रदेश की कानून व्यवस्था का हाल खुद ही समझा जा सकता है।
खाद्य मंत्री बंशीधर भगत ने कहा कि राशन कार्ड बनाने में यदि विभागीय स्तर पर लापरवाही की शिकायत पुष्ट हुई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। भगत ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत विपक्ष द्वारा उठाए गए इस मसले के जवाब में सदन को यह आश्वासन दिया।
दल-बदल कर भाजपा में शामिल भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा और धनौल्टी के विधायक प्रीतम पंवार का शुक्रवार को सदन में आना विपक्ष को नागवार गुजरा। व्यवस्था के प्रश्न पर कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने सदन में यह मामला उठाया और पीठ से दोनों विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की।
शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन प्रदेश के कर्मचारियों के मुद्दे सदन में गरमाए रहे। विपक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर कर्मचारियों के मुद्दों को उठाया। विपक्ष ने कहा कि सरकार ने पुलिस कर्मचारियों को ग्रेड पे देने की घोषणा की है, लेकिन अभी तक इस संबंध में शासनादेश नहीं हुआ है। प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरकर आंदोलन और हड़ताल करने के लिए मजबूर हैं।