छोटी-बड़ी विधानसभा से फर्क नहीं पड़ता...
कुंजवाल ने कहा कि बहुत सारे लोग यूपी की विधानसभा से उत्तराखंड की तुलना कर रहे हैं, लेकिन छोटी या बड़ी विधानसभा से कोई फर्क नहीं पड़ता है। काम उतना ही होता है। यह बात अलग है कि हमारे यहां विधानसभा का सत्र ज्यादा दिन नहीं चलता। सत्र चलाने के लिए बिजनेस जुटाना सरकार का काम होता है। यदि वह ऐसा नहीं कर सकती तो उसके लिए सरकार की ही जिम्मेदारी बनती है।
पंत ने की थी 500 कर्मचारियों-अधिकारियों की सिफारिश
कुंजवाल ने कहा कि विधानसभा गठन के बाद तत्कालीन विस अध्यक्ष प्रकाश पंत की अध्यक्षता में बनी समिति ने उत्तराखंड विधानसभा में 500 कर्मचारियों-अधिकारियों की नियुक्ति की सिफारिश की थी।
प्रेमचंद अग्रवाल ने भी कुछ गलत नहीं किया
कुंजवाल ने कहा कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की ओर से की गई नियुक्तियों को भी वह गलत नहीं मानते हैं। उन्होंने जो भी नियुक्तियां की हैं, वह सभी वैध हैं। हां यदि कहीं इन नियुक्तियों में लेन-देन या किसी भी तरह का भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
यशपाल आर्य और प्रकाश पंत के समय में भी हुईं नियुक्तियां
कुंजवाल ने कहा कि उनके समय में हुई नियुक्तियों को लेकर कुछ लोग कोर्ट चले गए, जबकि इससे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रहे प्रकाश पंत और यशपाल आर्य के समय में भी तमाम नियुक्तियां की गई थीं, उन पर किसी ने सवाल नहीं उठाए।