यूपी नगर निगम संशोधन समेत दो विधेयक प्रवर समिति को भेजे
विधानसभा में सत्ता पक्ष के विधायकों के विरोध में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश) नगर निगम अधिनियम, 1959 संशोधन विधेयक सदन में पारित नहीं हो सका। सरकार को बिल प्रवर समिति के हवाले करना पड़ा। प्रवर समिति एक महीने में अपनी सिफारिशें देगी।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी प्रवर समिति के सदस्य तय करेंगी। इसके अलावा राज्य विवि विधेयक भी प्रवर समिति को भेज दिया गया। इस विधेयक पर भी सत्ता पक्ष के विधायक ने एतराज जताया। सदन में जब अपनी ही सरकार के विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष के विधायक सवाल उठा रहे थे, उस दौरान विपक्ष सदन से अनुपस्थित था।
सदन पटल पर आए विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने ओबीसी के लिए हुए रैपिड सर्वे पर सवाल उठाए। कहा, कास्ट बेस्ड सर्वे जाति माता-पिता से होती है न कि स्थान से तय होता है। कहा, राज्य की डेमोग्राफिक प्रोफाइल पर चिंता करने की जरूरत है।
विधायक विनोद चमोली, प्रीतम पंवार, दुर्गेश्वर लाल साह ने भी सर्वे पर सवाल उठाया। कहा, विषय को प्रवर समिति के पास भेज दिया जाए। इस विषय काफी चर्चा हुई। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और सौरभ बहुगुणा ने भी पक्ष रखा। बाद में संसदीय कार्यमंत्री प्रेम चंद्र अग्रवाल ने प्रस्ताव किया कि विधेयक को प्रवर समिति को सौंप दिया जाए।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने कहा, इसे प्रवर समिति को भेजा जाएगा। समिति एक महीने में प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। उसकी अनुशंसा नगर पालिका और नगर पंचायत पर भी लागू होगी।
राज्य विवि विधेयक भी प्रवर समिति को भेजा
सत्तापक्ष के सदस्य के एतराज पर राज्य विवि विधेयक प्रवर समिति को भेज दिया गया। यह विधेयक विस में आठ सितंबर-2023 को पारित हुआ था। इसे राजभवन ने संदेश सहित विस को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया था। इसे संशोधन सहित विचार के लिए रखा गया। चर्चा के दौरान विधायक सुरेश गडिया ने विधेयक में संशोधन की मांग करते हुए प्रवर समिति को भेजने की मांग की। इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने इसका प्रस्ताव किया। कहा, प्रवर समिति के सदस्य भी विस अध्यक्ष तय करें। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने और समिति को एक महीने में अपना प्रतिवेदन देने का आदेश दिया।