दीदी का स्मरण करता हूं तो लगता नहीं है कि वे अब हमारे बीच नहीं है। शिक्षक नेता के रूप में उनका कार्यकाल रहा है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में चार बार सदस्य रहीं और सर्वाधिक मतों से जीत हासिल करने का रिकॉर्ड भी इंदिरा जी के नाम है। उन्हें राजनीति का लंबा अनुभव था। लेकिन कभी भी व्यवहार में अंतर नहीं आया। 2002 में जब मैं एबीवीपी का प्रदेश अध्यक्ष था और इंदिरा सरकार में मंत्री थी। एक बार उनसे मिलने गया तो दीदी ने कहा तुम सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हो और काम कराने भी आते हो। गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान मिलने के लिए इंदिरा जी के कमरे गए थे, तो उन्होंने ब्रेड पर बटर खुद लगा कर परोसे। उनके बोलने और काम करने की शैली समान थी।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री एवं नेता सदन
पक्ष और विपक्ष में समन्वय बनाने किया काम
नेता प्रतिपक्ष के रूप में इंदिरा हृदयेश की जगह बैठने में असहज महसूस कर रहा हूं। नए नेताओं का मार्गदर्शन करने में इंदिरा जी अग्रणी नेताओं की पंक्ति में थी। पक्ष और विपक्ष के साथ समन्वय बनाने का काम किया। चार बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद में रहते हुए ईमानदारी से कार्य किया। राज्य गठन के बाद उत्तराखंड के विकास और सड़कों के निर्माण किए गए कार्यों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
-प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष
संसदीय ज्ञान की भंडार थी इंदिरा
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन की सूचना मिलते ही मैं सन्न सा रह गया था। राजनीति में इंदिरा जी ने आयरन लेडी के रूप में अपनी छाप छोड़ी है। उनके पास संसदीय ज्ञान का भंडार था। उनके निधन से कांग्रेस को ही नहीं पूरे प्रदेश को क्षति हुई है।
-बंशीधर भगत, संसदीय कार्य मंत्री
दीदी इंदिरा हृदयेश अच्छे कार्यों की सराहना भी करतीं थीं। जहां उन्हें लगाता था कि ठीक नहीं है तो उस पर सख्त टिप्पणी करने में पीछे नहीं रही। हाल ही में मैं दिल्ली गया। उत्तराखंड सदन में 303 कमरे में ठहरा जहां पर इंदिरा जी का निधन हुआ। दीदी का स्मरण किया। रात भर दीदी सपनों में आती रही।
-प्रेम चंद अग्रवाल, अध्यक्ष विधानसभा
दलगत सीमा से ऊपर उठकर किया काम
डा. इंदिरा हृदयेश ने राजनीतिक जीवन में दलगत सीमा से ऊपर उठ कर काम किया। अफसरशाही पर उनका कंट्रोल था। मैंने उनका नाम झांसी की रानी रखा था। पूर्व सीएम स्व. नारायण दत्त तिवारी के बाद संसदीय ज्ञान सबसे ज्यादा इंदिरा जी को था। उनमें सबको साथ लेकर चलने की क्षमता था।
-सुबोध उनियाल, कैबिनेट मंत्री
मुझे इंदिरा जी के साथ और विरोध में काम करने का मौका मिला। 2000 में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के लिए इंदिरा हृदयेश का नाम तय हो गया था। लेकिन रातों रात पार्टी नेतृत्व ने नाम परिवर्तन कर हरीश रावत को अध्यक्ष बनाया गया। जिससे इंदिरा निराश हो गई थी। गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान हमारे लिए दीदी कमरे से ही खाना आता था। राजनीति के क्षेत्र में गिनी चुनीं महिलाएं ही आगे बढ़ी है। जिसमें इंदिरा हृदयेश भी एक है।
-हरक सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री
सदन में इन मंत्रियों व सदस्यों ने भी दी श्रद्धांजलि
सदन के पहले दिन डा. इंदिरा हृदयेश के स्मरण में विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज यशपाल आर्य, गणेश जोशी, अरविंद पांडेय, स्वामी यतीश्वरानंद, उप नेता प्रतिपक्ष करन महरा, विधायक मदन कौशिक, काजी निजामुद्दीन, ममता राकेश, राजकुमार ठुकराल, महेंद्र भट्ट, रीतू खंडूड़ी, प्रीतम सिंह पंवार, नवीन दुमका, विनोद चमोली, केदार सिंह ने यादों को सांझा किया।