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Uttarakhand Chunav 2022: हरीश रावत बोले- उत्तराखंडियत को बचाने के लिए कांग्रेस को वोट देना जरूरी

Sun, 13 Feb 2022 12:06 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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सोमवार की सुबह लोकतंत्र का एक ब्रह्मास्त्र आपके हाथों में थमाएगी जो शाम तक आपके पास रहेगा। सबके वादों की, सबके दावों की सुनवाई पूरी हुई। अब आपको फैसला सुनाना है। सबसे बड़ी अदालत जनता की होती है। सबसे बड़ा आदेश जनादेश होता है। हम आपका काम कुछ आसान किए दे रहे हैँ। पेश हैं राज्य में कांग्रेस के बड़े चेहरों में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से खास बातचीत।

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(1)  हरीश जी, उत्तराखंड का मतदाता कांग्रेस को क्यों वोट दे? टॉप तीन वजहें गिनाइए?
उत्तरः सबसे पहली वजह यह है कि कांग्रेस पार्टी के पास ही उत्तराखंड के लिए विकास की एक स्पष्ट नीति और लोक कल्याण का रोड मैप है। कांग्रेस के पास ही इतनी प्रशासनिक क्षमता है कि वह एक अच्छी काम करने वाली, सेवा करने वाली सरकार दे सकती है। दूसरा कारण यह है कि भाजपा पिछले पांच साल में उत्तराखंड की जन आकांक्षाओं को पूरा करने में पूरे तरीके से नाकाम रही है। विकास नकारात्मक दिशा में गया है। बेरोजगारी, बेतहाशा बढ़ी है। जनकल्याण अतीत की बात हो गई है। भ्रष्टाचार, शिष्टाचार बन गया है। खनन राज्य का सिद्धांत बना लिया गया है। तीसरा कारण है कि हमारे पास एक स्पष्ट व अनुभवी परिपक्व नेतृत्व है। कांग्रेस के पास एक अच्छी नेतृत्व शृंखला है। हमारे पास ही नेतृत्व करने की क्षमता रखने वाले लोगों की अच्छी बेंच स्ट्रैंथ है।

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(2) आरोप है कि उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस का चरित्र एक जैसा हो चुका है। यह कितना सच है?
उत्तरः मैंने कहा न, यदि चरित्र सिद्धांतों से बनता है तो कांग्रेस के सिद्धांत भाजपा से बिल्कुल विपरीत हैं। भाजपा बांटने की नीति में विश्वास करती है और लोगों के मन में एक-दूसरे के लिए विद्वेष पैदा कर राजनीति की खेती करती है। कांग्रेस समन्वय की नीति पर विश्वास करती है और सबको साथ लेकर चलती है। हमारा दृष्टिकोण बहुलवादी है, हमारा दृष्टिकोण सामाजिक न्याय का है, हमारा दृष्टिकोण संवैधानिक लोकतंत्रवादी है और भाजपा इन तीनों सिद्धांतों के विरोध में खड़ी है।

(3) अगर एक जैसा चरित्र नहीं है तो भाजपा सरकार के इतने बड़े चेहरे आपके पाले में क्यों दिखाई दे रहे हैं?
उत्तरः हम तो अपनी जगह पर हैं, हमारी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है, सवाल उठते हैं, बहस होती है। अलग-अलग व्यक्तित्वों में कभी-कभी टकराहट भी दिखाई देती है, मगर अपने अनुभव से हम लोग सामंजस्य बैठा लेते हैं। मगर भाजपा निश्चित तौर पर इस समय जबरदस्त रूप से अंतर्कलह की शिकार है। भाजपा में एक भगदड़ की स्थिति बनी हुई हैं। क्योंकि भाजपा ने कई ऐसे पाप किए हैं, जिनसे पिंड छुड़ाना भाजपा के लिए कठिन हो रहा है। उनमें एक बड़ा पाप यह है कि इन्होंने उत्तराखंड में दल-बदल करवाकर लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया। आज उसी का कुफल भाजपा को उत्तराखंड में भुगतना पड़ रहा है।

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(4) लोग कह रहे हैं कि उत्तराखंड ने हरियाणा से उसकी `आया राम-गया राम` वाली दलबदलू राजनीति की पहचान छीन कर वह सेहरा अपने सिर बांध लिया है। आप सहमत हैं?
उत्तरः वर्ष 2016 में जिस तरीके का ड्रामा हुआ, जिस तरीके से केंद्र सरकार ने दलबदल करवाने का महापाप किया, विधायकों को खरीद कर मेरी सरकार को तोड़ने का कुचक्र रचा और एक षडयंत्रपूर्वक किए गए तथाकथित स्टिंग को आधार बनाकर हमारी सरकार को बर्खास्त किया गया। जिस तरह हमारे बजट को चार महीने तक घुमाकर विधानसभा को बाध्य किया गया कि वह दूसरी बार बजट को परित करें। वह अपने आप में देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहला उदाहरण था। इस तरह `आया राम-गया राम` की अस्थिरता की राजनीति को उत्तराखंड में थोपने का अगर कोई जिम्मेदार है तो वह भारतीय जनता पार्टी है और इनका शीर्ष नेतृत्व है।

(5) आपके पास भरपूर तजुर्बा है, लेकिन उम्र का फैक्टर खिलाफ जाता दिखता है। कैसे संतुलन साधेंगे?
उत्तरः आज तकनीक के युग में उम्र कोई माने नहीं रखती है और फिर प्रशासन और विकास हौसले व सूझबूझ से चलाया जाता है, समझ से चलाया जाता है, सिद्धांतों और विचारों से चलाया जाता है। आपके पास चीजों की समझ होनी चाहिए। भाजपा में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिसके पास समग्र उत्तराखंड की समझ हो और उस समझ के आधार पर नीतियों को क्रियान्वित करने, योजनाओं को बनाने की क्षमता हो। यही भाजपा की कमजोर नस है। आज भाजपा के प्रति जो निराशा है लोगों में, उसका सबसे बड़ा कारण यही है कि उनका संपूर्ण नेतृत्व क्षमताहीन लोगों से भरा पड़ा है।

(6) कांग्रेस के लिए इस बार `करो या मरो` वाली स्थिति है। इतना पसीना बहाने की मजबूरी के पीछे `आप पार्टी` का असर है या मोदी-शाह के ताबड़तोड़ दौरों का?
उत्तरः भाजपा के पास इस समय अपार पाशविक शक्ति है, धन-बल है, प्रशासनिक बल है और उनके पास एक ऐसा नेतृत्व है, जिसका लोकतांत्रिक प्रणाली में कोई विश्वास नहीं है, जो महज वोटों की राजनीति करता है। इस बीच एक नए प्रकार के प्रतिद्वंदी से कांग्रेस का मुकाबला है। इस नई पार्टी का लक्ष्य, मुझे लगता है कि वहीं जाना है, जहां कांग्रेस शक्तिशाली है, जहां कांग्रेस भाजपा को पराजित करने कि स्थिति में है। आज हमें यह समझने की आवश्यकता है, देखने की जरूरत है कि वोट न कटें और न बटें। भाजपा की पाशविक शक्ति को पराजित करने के लिए हर प्रकार के उस व्यक्ति को, जो उनकी विचारधारा के खिलाफ है, एकजुट करने की जरुरत है।

(7) क्या कांग्रेस को कुमाऊं के मुकाबले गढ़वाल में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है?
उत्तरः नहीं, ऐसा नहीं है। दोनों जगह जनभावना समान रूप से कांग्रेस के पक्ष में है। मैदानी क्षेत्रों में भी इस समय हमें व्यापक समर्थन मिल रहा है। इस बार हमें राज्य के तीनों हिस्सों में बहुत अच्छा बहुमत मिलने जा रहा है।

(8) तराई के सिख किसान बहुल इलाकों में किसान आंदोलन के असर का क्या कुछ फायदा मिलता नजर आ रहा है?
उत्तरः निश्चित तौर पर मिल रहा है। क्योंकि किसान उस निरंकुशता को नहीं भूल पा रहा है जिसने उनके ऊपर तीन काले कृषि बिल थोपे। कुछ लोग यह कह रहे हैं कि किसान आंदोलन का तो समाधान हो गया। मगर किसान कह रहा है कि सात सौ किसानों के खून से जिनके हाथ रंगे हुए हैं, उनसे एक बार हम हिसाब जरूर लेंगे।

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(9) हरिद्वार की धर्मसंसद में संतों के बिगड़े बोल पर भाजपा की तरह कांग्रेस पार्टी भी खामोश क्यों रही? खुलकर क्यों नहीं बोली?
उत्तरः हमने इसकी खुलकर निंदा की है। यह हरिद्वार ही नहीं उत्तराखंड की सभ्यता के भी खिलाफ है। यह हमारे संविधान के भी खिलाफ है। मुझे खुशी है कि कांग्रेस के साथ अखाड़ा परिषद ने भी खुलकर इसका विरोध किया। यह सब वातावरण को दूषित करने की कोशिश का एक हिस्सा है। अच्छी बात है कि इस कोशिश की साधु-संत समाज ने भी निंदा की है।

(10) मुफ्त बिजली और लड़कियों के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसे कांग्रेस के वादों को क्या `आप पार्टी इफेक्ट` मानें?
उत्तरः हम तो पहले से ही जनहित की योजनाएं चलाते रहे हैं। हमने समाज कल्याण की पेंशनों को अपने नागरिकों का अधिकार बनाया, हमने गरीबों के कल्याण के लिए कई योजनाएं प्रारंभ कीं। लड़कियों को साइकिल और लैपटॉप देने की योजना चलाई। यह आप का इफेक्ट नहीं। बल्कि आप पार्टी ने हमारी योजनाएं अपने यहां कॉपी की हैं। हमने प्रदेश में `मेरे बुजुर्ग-मेरे तीर्थ` योजना चलाई, उन्होंने हमारी नकल की। हमने पेंशन की राशि एक हजार की, इसमें भी उन्होंने हमारी नकल की। हमने मॉडर्न स्कूल की योजना शुरू की, इसे उन्होंने अपने यहां लागू किया। हालांकि यह अच्छी बात है कि अगर कोई अच्छी योजनाओं को कॉपी करता है। आखिर वे भी तो इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।

(11) नए जिलों के गठन का मुद्दा कांग्रेस के घोषणापत्र से नदारद रहा। गैरसैंण में स्थायी राजधानी और सख्त भू-कानून पर भी स्पष्ट रूपरेखा नहीं दिखी। ऐसा क्यों?
उत्तरः गैरसैंण के मामले में हमने स्पष्ट कहा है कि हम राजधानी बनाएंगे। जिलों के गठन पर भी हमारा स्पष्ट मत है। भू-कानून पर भी हमने कहा है, हम एक संपूर्ण भू-कानून बनाएंगे और बाहरी लोगों की ओर से जमीनों की खरीद-फरोख्त को रोका जाएगा। हमारे भू-कानून में पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी के साथ भूमि सुधार भी होगा।

(12) प्रदेश भाजपा की चुनावी नैया के पास मोदी के नाम और राम के नाम की दो पतवारें हैं। कांग्रेस की नैया कैसे पार होगी?
उत्तरः हमारी नैया जनता के सहारे पार हो रही है। यह चुनाव उत्तराखंड की जनता बनाम भाजपा है। लोग तो पिछले पांच सालों की तरफ देख रहे हैं। भाजपा ने पिछले पांच साल जिस तरह से शासन किया है, कोरोना में जैसे लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया गया, स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल रहा, अंधाधुंध खनन और बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसे तमाम मुद्दे हैं, उन सबके चलते जनता भाजपा से बुरी तरह खफा है। लोगों को लगता है कि भाजपा ने उत्तराखंड के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई है। लोगों को लगता है कि जितना समर्थन हमने भाजपा को दिया, उतनी गंभीरता से हमको नहीं लिया गया। वास्तव में, यहां भी पश्चिम बंगाल जैसी स्थिति बन रही है। जितना भाजपा और उनका शीर्ष नेतृत्व हम पर प्रहार कर रहा है, उतना ही जनता के बीच हमारा समर्थन बढ़ता जा रहा है। इस चुनाव को जनता लड़ रही है और वह जनता भाजपा से लड़ रही है। इसलिए इस चुनाव में कोई दूसरा मंत्र काम आने वाला नहीं है। जनता के पास ही असली मंत्र है।

(13) क्या कांग्रेस की नैया को गैरों से ज्यादा अपनों से खतरा है? छटपटाते बागियों से कैसे निपटेंगे?
उत्तरः यह समस्या दोनों पार्टियों में है। छोटे राज्यों में यह समस्या कुछ समय तक रहेगी। जब तक हर स्थान पर एक नेतृत्व स्थापित नहीं हो जाता, ये सूरतेहाल रहेगा। जहां हमारा नेतृत्व स्थापित है, वहां ऐसी स्थितियां नहीं हैं। जिन स्थानों पर नहीं है, वहां ऐसी स्थितियां आई हैं। यही समस्या भाजपा समेत छोटे दलों जैसे उक्रांद में भी है।

(14) भाजपाई घोषणापत्र में लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे ध्रुवीकरण के मुद्दों से मुकाबले की कांग्रेस की रणनीति क्या है?
उत्तरः हमको उनकी पिच पर खेलना ही नहीं है। भाजपा कितना ही कुछ कहे, हमारी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं है। हम महंगाई, बेरोजगारी, अंधाधुंध खनन, पर्यावरण, ठप पड़े हुए विकास पर, अर्थव्यवस्था में जो गिरावट आई है, उसके सवाल पर चुनाव के मैदान में हैं। हम अपनी ही पिच पर खेलेंगे। हमें विश्वास है कि जनता आखिरकार अपने असली सवालों को पहचान कर वोट करेगी।

(15) सरकार बनने के बाद सबसे पहला काम क्या करना चाहेंगे?
उत्तरः तीन बातें हमारी प्राथमिकता में होंगी। पहली प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए संसाधन जुटाना होगी। दूसरी अस्त-व्यस्त पड़े प्रशासनिक तंत्र को पुनः ढर्रे पर लाकर चुस्त-दुरुस्त बनाना होगी। तीसरी प्राथमिकता यह होगी कि हमने जनता से जो वादे किए हैं, उन सब पर अमल करने के काम आरंभ किए जाएं। तभी जनता के विश्वास का मान हम रख पाएंगे। 
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