उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव में उत्तराखंड में 82 लाख 37 हजार 913 मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करना है। चुनाव आयोग की कोशिश है कि राज्य का प्रत्येक मतदाता लोकतंत्र के इस चुनावी पर्व में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में 26 विधानसभा सीटों पर मतदान का रिकार्ड बहुत उत्साहित करने वाला नहीं था। चार विधानसभा सीटों पर तो मतदान का प्रतिशत 40 से 50 प्रतिशत के बीच सिमट गया।
प्रदेश की 22 शहरी व कस्बाई सीटों पर जहां मतदाताओं से ज्यादा जागरूक होने की उम्मीद की जाती है, वहां मतदान का प्रतिशत 60 फीसदी से भी कम रहा। अभिजात्य, नौकरीपेशा लोगों की नगरी माने जाने वाली देहरादून जिले की कैंट, धर्मपुर, मसूरी, राजपुर रोड के अधिकतर मतदाताओं ने पिछले चुनाव में वोट डालने के बजाय घर में छुट्टी मनाने का विकल्प चुना।
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प्रदेश में सबसे कम और सबसे अधिक मतदान
सल्ट विधानसभा सीट पर सबसे कम 46.01 प्रतिशत मतदान हुआ था
लक्सर विधानसभा सीट पर सबसे अधिक 81.95 प्रतिशत मतदान हुआ था
जिलावार सबसे कम और सबसे अधिक मतदान
जनपद सबसे कम सबसे अधिक
देहरादून कैंट ( 57.14) सहसपुर(72.96)
हरिद्वार रुड़की (64.05) लक्सर (81.95)
यूएसनगर काशीपुर (69.15) सितारगंज (81.36)
नैनीताल नैनीताल (56.89) लालकुआं (72.37)
अल्मोड़ा रानीखेत (51.77) अल्मोड़ा (58.86)
पौड़ी चौबट्टाखाल (46.91) कोटद्वार (68.57)
टिहरी घनसाली (49.19) धनौल्टी (64.44)
उत्तरकाशी यमुनोत्री (67.76) पुरोला (73.39)
पिथौरागढ़ गंगोलीहाट (54.92) धारचूला (62.61)
चमोली कर्णप्रयाग (56.40) बदरीनाथ (62.84)
रुद्रप्रयाग रुद्रपप्रयाग (59.28) केदारनाथ (65.77)
चंपावत लोहाघाट (57.09) चंपावत (66.43)
बागेश्वर बागेश्वर (60.11) कपकोट (62.28)
2017 में सबसे कम मतदान वालीं सीटें
सल्ट में 46.01, चौबट्टाखाल 46.91, लैंसडौन 47.81 व घनसाली 49.19 प्रतिशत।
50 से 60 प्रतिशत मतदान वाली सीटे
धर्मपुर, देहरादून कैंट, राजपुर रोड, मसूरी, रायपुर, नैनीताल, रानीखेत, द्वाराहाट, सोमेश्वर, जागेश्वर, अल्मोड़ा, पौड़ी, यमकेश्वर, श्रीनगर गढ़वाल, प्रतापनगर, देवप्रयाग, टिहरी, कर्णप्रयाग, थराली व लोहाघाट, रुद्रप्रयाग, गंगोलीहाट।
60 से 70 प्रतिशत वालीं सीटें
ऋषिकेश, डोईवाला, रुड़की, हरिद्वार, काशीपुर, भीमताल, हल्द्वानी, कालाढूंगी, नरेंद्र नगर, धनोल्टी, यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ, पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला, कोटद्वार, केदारनाथ, चंपावत, बागेश्वर व कपकोट।
70 से 80 प्रतिशत वालीं सीटें
विकासनगर, चकराता, सहसपुर, बीएचईएल रानीपुर, झबरेड़ा, मंगलौर, खानपुर, ज्वालापुर, किच्छा, रुद्रपुर, नानकमत्ता, बाजपुर, जसपुर, खटीमा, रामनगर व पुरोला।
80 प्रतिशत से ऊपर वालीं सीटें
भगवानपुर, हरिद्वार ग्रामीण, पिरान कलियर, लक्सर, गदरपुर, सितारगंज।
मतदान अधिकार ही नहीं, नैतिक कर्तव्य भी
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि मतदान अधिकार ही नहीं है, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य भी है। लोकतंत्र के पर्व का हमें सदुपयोग करना चाहिए। सिर्फ आलोचना करने से काम नहीं चलेगा। आश्चर्य की बात है कि राजधानी देहरादून जो शिक्षा की राजधानी भी है और राजनीतिक जागरूकता भी अधिक है, बावजूद इसके यहां कम मतदान होना चिंता का विषय है। आज जबकि चुनाव आयोग की ओर से बुजुर्ग, बीमार, दिव्यांग मतदाताओं के लिए तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, सभी को वोट देने के लिए घरों से बाहर निकलना चाहिए।