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Uttarakhand Assembly Election 2022: कांग्रेसी अब ढूंढ रहे दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाता, पढ़िए क्या है पूरा मामला

Tue, 22 Feb 2022 05:09 PM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान , अमर उजाला, देहरादून

सार

राज्य के विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग की ओर से पहली बार दिव्यांग, 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग और अशक्तजनों की सुविधा के लिए मतदाताओं के घर पर जाकर मतदान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। इसके लिए ऐसे लोगों से पहले ही फॉर्म 12-डी भरवाया गया था। ऐसे लोगों को एबसेंटी वोटर नाम दिया गया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : i stock
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विस्तार
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विधानसभा चुनाव के लिए 14 फरवरी को मतदान के बाद डाक मतपत्रों के जरिये मतदान की प्रक्रिया अभी जारी है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कहना है कि उनके कई प्रत्याशियों को अभी तक भी एबसेंटी मतदाताओं (80 से अधिक आयु वाले और दिव्यांग) की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई। कुछ प्रत्याशियों की ओर से इस संबंध में गड़बड़ी की आशंका जताने के बाद खलबली मची है। 

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राज्य के विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग की ओर से पहली बार दिव्यांग, 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग और अशक्तजनों की सुविधा के लिए मतदाताओं के घर पर जाकर मतदान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। इसके लिए ऐसे लोगों से पहले ही फॉर्म 12-डी भरवाया गया था। ऐसे लोगों को एबसेंटी वोटर नाम दिया गया था। जिनकी कुल संख्या 16 हजार 858 थी। इनमें 14 हजार 569 मतदाता 80 प्लस वाले, दो हजार 162 दिव्यांग और 127 अति आवश्यक सेवा वाले मतदाता थे।

15 हजार 940 एबसेंटी मतदाता क़र चुके थे अपने मत का प्रयोग
निर्वाचन आयोग के अनुसार, 12 फरवरी तक 15 हजार 940 एबसेंटी मतदाता अपने मत का प्रयोग कर चुके थे। निर्वाचन कार्यालय की मानें तो सभी प्रत्याशियों को एबसेंटी मतदाताओं की सूची उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन कांग्रेस के कुछ प्रत्याशियों की ओर से उन्हें सूची उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद से पार्टी में खलबली मची है।
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पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने बताया कि यह बात सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तमाम प्रत्याशियों से फोन पर बातचीत कर इस बाबत जानकारी जुटाई। तकरीबन 25 प्रत्याशियों की ओर से बताया गया कि उन्हें एबसेंटी मतदाताओं की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई। 

सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने इस संबंध में देर तक पार्टी पदाधिकारियों और प्रत्याशियों से बातचीत की। संभव है कि इस संबंध में मंगलवार को पार्टी मुख्य निर्वाचन कार्यालय का दरवाजा खटखटाए। इधर, पार्टी प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि मतदान ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के डाक मतपत्रों के संबंध में भी यही शिकायत प्राप्त हुई है।

कई ऐसे कर्मचारी हैं, जिन्होंने डाक मतपत्र के लिए आवेदन किया है, लेकिन उन्हें डाक मतपत्र आवंटित नहीं किए गए हैं। साथ ही कई जिलों से ऐसी भी शिकायत है कि ऐसे कई कर्मियों को मतपत्र प्राप्त करने के लिए जारी प्रार्थना पत्र आवंटित नहीं किए जा रहे हैं, जो कि निष्पक्ष मतदान को परिलक्षित नहीं करता है।

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कौन हैं एबसेंटी मतदाता

संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रताप शाह ने बताया कि अबसेंटिव सूची में 80 वर्ष से अधिक आयु वाले वह मतदाता हैं, जो निर्वाचन आयोग की सूची में पहले से दर्ज हैं। जहां तक दिव्यांग मतदाताओं का प्रश्न है तो सूची में उन लोगों के नाम हैं, जिन्हें सीएमओ की ओर से दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इसके अलावा दिव्यांगता 40 प्रतिशत से अधिक है। 
 
सर्विस वोटर को मतपत्र पाने के लिए पहले आवेदन करना पड़ता है। लेकिन ऐसी भी शिकायतें प्राप्त हुईं हैं, जिसमें आवेदकों को आवेदन पत्र ही जारी नहीं किए गए। चुनाव आयोग की ओर से इसका कोई कार्यक्रम भी जारी नहीं किया गया। मामले में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए थी, जो नहीं बरती गई। यह सीधे-सीधे मतदान में धांधली का मामला है। एक शिकायत हमने कर दी है। कुछ और शिकायतों के साथ हम शीघ्र ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिलेंगे। 
- गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष 

एबसेंटी वोटर के संबंध में प्रत्येक प्रत्याशी को सूची उपलब्ध कराई गई है। चूंकि यह व्यवस्था राज्य में पहली बार लागू की गई थी, इसलिए निर्वाचन कार्यालय की ओर से पूर्व में ही इसका खूब प्रचार-प्रसार भी किया गया था। यदि किसी भी प्रत्याशी या पार्टी की ओर से ऐसी कोई शिकायत सामने आती है कि एबसेंटी मतदाता ने वोट नहीं दिया और उसका वोट पड़ गया तो इसकी निष्पक्ष रूप से जांच कराई जाएगी। जहां तक सर्विस वोटरों का संबंध है, जिसमें सैन्य और अर्द्धसैनिक बल आते हैं, तो इनकी अलग वोटर लिस्ट होती है, यह सूची किसी प्रत्याशी को उपलब्ध नहीं कराई जाती है। 
- प्रताप शाह, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन कार्यालय
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