पहली बार वर्ष 2002 में कांग्रेस जब सत्ता में आई तो यह सरकार पार्टी के भीतर एनडी और रावत के बीच रोज होने वाले झगड़ों के लिए जानी गई। इसी सरकार में हरीश रावत कांग्रेस में एक मजबूत ध्रुव बनकर उभरे। इसके बाद तिवारी गए तो उनके समर्थकों की कमान इंदिरा हृदयेश ने संभाल ली। तब इंदिरा पार्टी में दूसरा ध्रुव बनकर उभरीं। इंदिरा के बाद अब उनके समर्थकों की कमान प्रीतम सिंह ने संभाल रखी है। जो फिलहाल पार्टी में हरीश के बाद दूसरे मजबूत गुट के रूप में सक्रिय हैं।
पार्टी के पास इतिहास दोहराने का है मौका
राज्य की राजनीति में सत्ता हस्तांतरण के इतिहास के बीच कांग्रेस के पास वापसी का सुनहरा मौका भी है। पार्टी भले ही अपने बुरे वक्त से गुजर रही है, लेकिन सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त भी है। पार्टी नेताओं की मानें तो बीते चुनाव में राज्य ही नहीं पूरा देश मोदी उन्माद में बहक गया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि इस बार उसके पास रोजगार, महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे तमाम मुद्दे हैं, लेकिन सत्ताधारी भाजपा के पास मुद्दों का अभाव है। ऐसे में बार-बार मोदीनाम का सहारा उसकी नैया को पार नहीं लगा सकता।