2017 की मोदी लहर से 57 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने वाली भाजपा इस बार फिर मोदी फैक्टर के सहारे कुर्सी पर काबिज होने की कोशिशों में जुट गई है। पार्टी ने चुनाव अभियान के बीच में ही मोदी फैक्टर पर प्रचार-प्रसार तेज कर दिया है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से पार्टी मोदी फैक्टर से जीत का रास्ता निकालने में लगी है।
2012 के चुनाव में भाजपा ने 70 में से 31 विधानसभा सीटें जीतीं और कांग्रेस ने 32 सीटें जीतकर सरकार बनाई। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते भाजपा की जीत का आंकड़ा सीधे 57 पर पहुंच गया। अब 2022 के चुनाव में भाजपा अपनी जीत को पुख्ता करने और हर पांच साल में सरकार बदलने की रिवायत से छुटकारा पाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस बार के चुनाव मैदान में अबकी बार-60 पार के दम के साथ उतरने वाली भाजपा ने बीच चुनाव अभियान में ही फिर मोदी फैक्टर में अपनी जीत की राह तलाश करनी शुरू कर दी।
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खुद भाजपा के आला नेता भी यह मान रहे हैं कि प्रदेश में इस बार 2017 जैसी मोदी लहर नहीं है लेकिन मोदी के चहेतों के बीच कमल खिलाने के लिए प्रदेश में भाजपा ने अपनी रणनीति बदली है। इसके तहत भाजपा ने अब उत्तराखंड की पुकार, मोदी-धामी सरकार के नारे के साथ सभी विधानसभाओं तक प्रचार-प्रसार तेज कर दिया है। प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को भी यह समझाया गया है कि किस तरह से उन्हें जनता के बीच मोदी को मजबूत करने का संदेश देना है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मोदी के पक्ष में भाजपा को अपना वोट दें।
अंदरखाने भाजपा के बड़े नेता भी यह मान रहे हैं कि प्रदेश में इस बार मोदी लहर भले न हो लेकिन मोदी फैक्टर मजबूती से कायम है। अब यह दस मार्च को ही साफ हो पाएगा कि मोदी फैक्टर ने भाजपा को कितनी राहत दी। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन का कहना है कि नरेंद्र मोदी हम सबके आइकन हैं। उनके काम और छवि से प्रदेश में भाजपा को निर्विवाद रूप से लाभ होगा।