डोईवाला : इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत विधायक हैं और वह पार्टी से अनुरोध कर चुके हैं कि वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते। यहां पार्टी को किसी मजबूत प्रत्याशी को उतारना चाहती है। इस पर हाल ही में पार्टी में शामिल हुए जनरल बिपिन रावत के भाई कर्नल विजय सिंह रावत के नाम की भी चर्चा है। टिकट की दौड़ में कई और नाम हैं।
कोटद्वार : इस सीट पर विधायक हरक सिंह रावत को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। यहां पार्टी को मजबूत प्रत्याशी की तलाश है। टिकट की दौड़ में कई नाम है।
झबरेड़ा : इस सीट पर भाजपा के देशराज कर्णवाल विधायक हैं। उन्हें टिकट कटने का भय सता रहा है। उनके स्थान पर उनकी पत्नी वैजयंती माला को टिकट देने की चर्चाएं हैं। कर्णवाल ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर पत्नी को उम्मीदवार बनाए जाने की गुहार लगाई है।
रुद्रपुर : इस सीट पर भाजपा के ही राजकुमार ठुकराल विधायक हैं। 2012 व 2017 के चुनाव में जीत चुके हैं। लेकिन इस बार उनके टिकट पर संकट के बादल हैं। पार्टी यहां नए चेहरे पर दांव लगाने की सोच रही है।
लालकुआं : इस सीट पर भाजपा के नवीन चंद दुम्का विधायक हैं। बुजुर्ग दुम्का की सीट पर इस बार कई नए चेहरों ने टिकट की दावेदारी की है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता अपने एक रिश्तेदार को टिकट दिलाने के लिए जोर लगा रहे हैं।
पिरान कलियर : इस सीट पर कांग्रेस के फुरकान अहमद विधायक हैं। यहां पार्टी मजबूत उम्मीदवार की तलाश में है।
हल्द्वानी : इस सीट पर कांग्रेस की स्व. इंदिरा हृदयेश विधायक रहीं। इस सीट पर टिकट को लेकर भाजपा में घमासान हैं। नगर निगम के मेयर जोगेंद्र सिंह रौतेला एक बार फिर टिकट की दौड़ में शामिल हैं।
रानीखेत : इस सीट पर कांग्रेस के करन माहरा विधायक हैं। यहां से अजय भट्ट चुनाव लड़ते रहे हैं। उनके लोकसभा चले जाने के बाद अब भाजपा की मजबूत प्रत्याशी की खोज पूरी नहीं हो पाई है।
जागेश्वर : यह सीट भी कांग्रेस के कब्जे में है। यहां से गोविंद सिंह कुंजवाल विधायक है। कुंजवाल को टक्कर देने के लिए भाजपा रणनीति बना रही है। लेकिन अभी तक प्रत्याशी का नाम तय नहीं कर पाई।
उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा के चुनाव के घोषणा पत्र (दृष्टिपत्र) के लिए भाजपा के पास जनता से 78610 सुझाव पहुंचे। इनमें 51279 सुझाव 120 सुझाव पेटिकाओं के माध्यम से पार्टी को प्राप्त हुए जबकि 27331 सुझाव ऑनलाइन मिले। पूर्व केंद्रीय मंत्री और दृष्टि पत्र समिति के संयोजक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने यह जानकारी दी। प्रदेश पार्टी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में 70 विधानसभा क्षेत्रों से लौटे एलईडी रथों में लगी 120 जन सुझाव पेटिकाएं खोली गईं।
निशंक का कहा कि पार्टी ने आम लोगों की सहभागिता के अनुरूप दृष्टि पत्र बनाने का संकल्प लिया। हमने अब तक जो कहा सदैव किया। इसीलिए प्रदेश के आखिरी छोर तक हमारे रथ गए और सुझाव लेकर आए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जो आम जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए अपना चुनावी संकल्प तैयार करती है। निशंक ने कहा कि उत्तराखंड को भाजपा ने बनाया है और उसे संवारने के लिए संकल्पित है।
प्रदेश का कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि भाजपा का दृष्टि पत्र उनके सुझाव के अनुरूप नहीं बना। यह अद्भुत दृष्टि पत्र होगा, जो जनता के लिए जनता का दृष्टि पथ होगा। हमने इसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, किसान, श्रमिक, मजदूर के सुझावों का विश्लेषण और परामर्श करके बनाएंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए भी उत्तराखंड में कानून बनें। लघु एवं सूक्ष्म उद्योग से जुड़े लोगों ने भी कहा कि जब कोई महामारी आती है तो सबसे ज्यादा हानि इस वर्ग को होती है। उन्होंने अपने सुझाव पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड कैसे स्मार्ट बने उसके लिए भी सुझाव दिए।
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल ने कहा कि पार्टी जन-जन के अनुरूप अपना रिपोर्ट कार्ड रखने का कार्य 6 महीने, 1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष, 4 वर्ष और पांच वर्ष पूर्ण होने पर जनता के सामने रखती है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ज्योति प्रसाद गैरोला ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, दृष्टि पत्र समिति के सदस्य प्रोफेसर कुलश्रेष्ठ, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन, प्रदेश प्रवक्ता विनोद सुयाल, प्रदेश प्रवक्ता विपिन इंजीनियर, उद्योग धंधों, व्यापार मंडल से जुड़े विशिष्ट जन उपस्थित रहे।