श्रीनगर में छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रखने वाले हरक सिंह रावत ने 1989 में पौड़ी सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन 1991 चुनाव में वह पौड़ी सीट से ही चुनाव जीत कर पहली बार विधायक बने। तब मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने उन्हें पर्यटन राज्य मंत्री बनाया। 1993 चुनाव में भी वह पौड़ी से जीते।
1996 में वे भाजपा छोड़ बसपा में शामिल हो गए, तब तत्कालीन सीएम मायावती ने पर्वतीय विकास परिषद में उपाध्यक्ष बनाया। एक महीने बाद ही वे उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और महिला और बाल विकास बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए। रावत उत्तर प्रदेश बसपा के महामंत्री के साथ ही उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष भी रहे हैं। 1998 चुनाव में वह बसपा के टिकट से पौड़ी गढ़वाल सीट पर जीत नहीं दर्ज कर पाए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।
हरीश और कांग्रेस को उज्याडू बैल स्वीकार : भाजपा
भाजपा से निकाले गए पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के कांग्रेस में शामिल होने पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हरीश रावत हरक सिंह को उज्याडू बैल कहकर कोसते थे, आज वही उन्हें स्वीकार है। उन्होंने कहा कि गलत बयानी के लिए हरीश रावत को सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कल तक सार्वजनिक और मीडिया मंचों पर उनकी पोल खोलने वाले हरक को पार्टी में शामिल करने का तो यही अर्थ है कि उन्हें वह सभी आरोप स्वीकार हैं। कल तक हरीश रावत उनको लोकतंत्र का हत्यारा बताते हुए पानी पी-पी कर अनेकों अलंकारों से सुशोभित कर रहे थे। आज उनको और कांग्रेस को वही उज्याडू बैल स्वीकार है।
उन्हें जनता के सामने अपने इस हृदय परिवर्तन के कारणों को स्पष्ट करना चाहिए अन्यथा जनता से गलतबयानी के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। इस सारे प्रकरण के बाद जनता में भी उनकी पोल खुल गई है और न केवल हरीश रावत और बल्कि किसी भी कांग्रेस नेता की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसलिए उनका सकारात्मक वोट प्रदेश में भाजपा की पुन: सरकार बनाने के पक्ष में पड़ने वाला है।