चारधाम बारहमासी सड़क परियोजना के निर्माण को अब जलवायु परिवर्तन के हिसाब से भी परखा जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता मेें गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने महसूस किया है कि जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में भी सड़क परियोजना का बारीकि से अध्ययन किया जाना जरूरी है। समिति 16 अक्तूबर को निर्माणाधीन सड़क का स्थलीय निरीक्षण करेगी। समिति ने तय किया है कि नवंबर की शुरुआत में ही एक अंतरिम रिपोर्ट तैयार कर संबंधित मंत्रालय को सौंप दी जाएगी।
उच्चाधिकार प्राप्त समिति की देहरादून में हुई पहली बैठक में बारहमासी सड़क परियोजना की पूरी जानकारी केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति को दी। समिति के सदस्यों ने मंत्रालय से जानना चाहा था कि सड़क निर्माण कहां-कहां हुआ है और निर्माण में क्या सावधानियां बरती गई। समिति ने यह भी पूछा कि वर्तमान में जिन मानकों का पालन किया जा रहा है कि वे प्रभावी हैं या नहीं, अन्य कौन से मानक हैं जिनको उपयोग में लाया जा सकता है।
अध्यक्ष रवि चोपड़ा ने बताया कि समिति ने 16 अक्तूबर को चारधाम बारहमासी सड़क परियोजना का दौरा करने का फैसला किया है। इस दौरे के जरिए समिति यह जानना चाहती है कि धरातल पर स्थिति क्या है। इस दौरे से पहले ही समिति की संबंधित अधिकारियों केे साथ एक और बैठक भी संभव है। समय की कमी को देखते हुए समिति ने नवंबर की शुरूआत में अंतरिम रिपोर्ट संबंधित मंत्रालय को सौंप देने का भी फैसला किया है।
जलवायु परिवर्तन के हिसाब से भी होगी परख...
खास बात ये भी है कि समिति अब इस परियोजना को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के आधार पर भी परखेगी। समिति अध्यक्ष के मुताबिक निर्माण में इस नई सोच को भी शामिल किया जाना जरूरी है। जरूरत पड़ी तो समिति का विस्तार कर उसमें जलवायु परिवर्तन से संबंधित विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। समिति अध्यक्ष के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण स्थिति तेजी से बदल रही है। यह देखा जाना जरूरी है कि परियोजना में बदली हुई स्थिति के हिसाब से निर्माण किया जा रहा है या नहीं और निर्माण में जलवायु परिवर्तन के किन पहलुओं को शामिल किया जाए।
पुराने अनुभवों के हिसाब से भी होगा आकलन
बैठक में रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि ने कहा कि दो लेन की सड़कों का निर्माण 15 साल पहले भी किया गया था। उस समय आईं समस्याओं, उनके समाधान आदि को भी परखा जाना चाहिए। समिति ने तय किया कि दो लेन वाली अन्य सड़कों का लेखा जोखा भी लिया जाए।
ऑल वेदर रोड....एक नजर
परियोजना को 2019-20 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
कुल 889 किमी लंबाई का ये मार्ग कई चरणों में पूरे होंगे।
11700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। करीब 3692 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां भी हो चुकी हैं
220.66 किलोमीटर की अंतिम अनुमति मिल चुकी है
393.98 किलोमीटर तक के 21 प्रस्ताव मंजूर, लागत 4371.87 करोड़ रुपये
937 करोड़ रुपये के छह प्रस्ताव अभी मंजूरी मिलनी है
क्योें खास है यह परियोजना
इस सड़क परियोजना के तहत प्रदेश के चारों धामों को और सीमावर्ती क्षेत्रों को बारहमासी सड़क से जोड़ा जाना है। सड़क संपर्क के लिहाज से ही यह सड़क महत्वपूर्ण है और सड़क निर्माण पर सीधी निगाह प्रधानमंत्री कार्यालय की है।
क्या था विवाद
यह परियोजना पर्यावरण के मानकों के उल्लंघन को लेकर पहले से ही विवादों में रही है। एनजीटी ने इस सड़क को लेकर कमेटी का गठन किया था। यह मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी का विस्तार किया और पर्यावरणविद रवि चोपड़ा को अध्यक्ष बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने तीन माह में कमेटी को रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
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