जब उसने वह चेक अपने खाते में लगाया तो चेक बाउंस हो गया। उधर मामले में आरोपी अतिया साबरी ने अपने अधिवक्ता संजय वर्मा के माध्यम से कोर्ट को बताया कि उसके द्वारा उनसे कोई चेक नहीं लिया गया है। उसके पति ने उसे तीन तलाक हो जाने के बाद उसे झूठे मामले में फंसाने के लिए फर्जी खाता खुलवाकर उसके नाम से अपने साथियों अफजल समीर व शरीफ के माध्यम से तीन चेक खाते में जमा कराए है।
चेक पर उसके हस्ताक्षर नहीं है। मामले के अधिवक्ता संजय वर्मा के मुताबिक न्यायिक मजिस्ट्रेट चंदेश्वरी सिंह ने उक्त मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य, खाता फोरेंसिक जांच, दो बैंक कर्मियों के धारा 164 के बयान दर्ज करने के बाद शरीफ अहमद के विरुद्ध पत्रावली पत्र चार्ज शीट का अवलोकन करते हुए अतिया साबरी को एनआई एक्ट अधिनियम की धारा 1881 की धारा 138 के आरोप में दोषमुक्त कर दिया है।