चूंकि हिमाचली राज्य में सौर ऊर्जा की दृष्टि से भी बेहद संभावनाएं हैं। राज्य सरकार ने इस दिशा में कोशिशें भी की हैं, लेकिन वह अपर्याप्त हैं। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना हो या केंद्रीय सौर ऊर्जा की परियोजनाएं, सभी में अभी तक गति की दरकार है। उरेडा के माध्यम से काम तो हो रहा है, लेकिन इसे कमतर ही माना जाएगा। विशेषज्ञों की मानें तो अगर सरकार सौर ऊर्जा के छोटे प्रोजेक्ट लगाने की प्रक्रिया को सरल बना दे तो निश्चित तौर पर उत्तराखंड सौर ऊर्जा का बड़ा उत्पादक राज्य बन सकता है।
बांधों से इस तरह के नुकसान से भी पार पाना होगा
दिल्ली विश्वविद्यालय के पंडित एवं ग्रुम्बिन (2012) ने मॉडलिंग का उपयोग करते हुए भारतीय हिमालय क्षेत्र में 292 बांधों (निर्माणाधीन और प्रस्तावित) का वर्गीकरण किया गया। उन्होंने अनुमान लगाया कि इन परियोजनाओं से 54,117 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा और 1,14,361 हेक्टेयर क्षेत्र बांध से संबंधित गतिविधियों से क्षतिग्रस्त हो जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2025 तक 22 पुष्पीय पौंधों एवं 7 कशेरुकी जन्तु प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी।