सदन में आउटसोर्र्सिंग की नियुक्तियों और उपनल कर्मचारियों के आंदोलन पर सरकार आखिरकार जाग गई है। शासन ने पांच शासनादेश जारी किए हैं, जिसमें किसी उपनल या आउटसोर्सिंग कर्मचारी को नहीं हटाने, निकाले गए कर्मचारियों को दोबारा नियुक्ति देने जैसे मामलों पर एक बार फिर आदेश हुए हैं।
सदन में सीएम के आश्वासन पर जारी आदेशों के बाद अब उपनल के माध्यम से मिलने वाली नियुक्ति संविदा कर्मचारियों की श्रेणी में आ जाएगी। जिनका भविष्य में नियमितीकरण भी संभव होगा।
उपनल कर्मचारियों के आंदोलन और सदन में हंगामे के बाद बुधवार को नए सिरे से आदेश जारी हुए। हालांकि मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह इससे पहले भी जारी आदेशों से कुछ को निकाल चुके हैं।
हटाए गए 250 कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने के लिए सचिवों और विभागाध्यक्षों को आदेशित किया गया है। सीएस ने भविष्य में किसी उपनल कर्मचारी को नहीं हटाने का आदेश एक बार फिर जारी किया है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटीः
आउटसोर्सिंग वालों को नियमित करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनी है, जिसमें वित्त, कार्मिक, सैनिक कल्याण सचिव सहित विधायक हीरा सिंह बिष्ट सदस्य होंगे।
उपनल कर्मचारियों के 9 से 17 मार्च तक चले आंदोलन और हड़ताल पर उनका वेतन नहीं काटने और उपार्जित अवकाश देने का शासनादेश भी जारी किया गया है।
राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के महामंत्री रवि पचौरी ने बताया कि उपनल कर्मचारियों के हित में लिया गया फैसला स्वागत योग्य है। हमारी सबसे बड़ी मांग नियमितीकरण के लिए बनी कमेटी के जल्द निर्णय देने के लिए है।
मातृत्व अवकाश पर मुहर जल्द
उपनल महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश देने के लिए शासन ने मसौदा तैयार कर लिया है। मुख्य सचिव ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर सीएम को भेज दिया है।
इस आदेश के प्रभावी होने पर आउटसोर्र्सिंग महिला कर्मचारियों को 6 माह तक का मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। यह उपनल सहित अन्य आउटसोर्र्सिंग एजेंसियों में तैनात कर्मचारियों के लिए भी प्रभावी होगा।