कानूनी परीक्षण के बाद लिया गया फैसला
पहले ब्लूटूथ से नकल मामले में अभ्यर्थियों ने भले ही अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को कानूनी पचड़ों में फंसा दिया हो लेकिन इस बार आयोग ने बाकायदा विधिक परीक्षण के बाद ही इन्हें डिबार किया है। आयोग के सचिव एसएस रावत के मुताबिक, सभी पहलुओं को देख परखकर नियमानुसार पांच साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
सभी आयोग की सभी परीक्षाओं पर प्रतिबंध
नकल के जिन आरोपियों को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग ने डिबार किया है, वे अब किसी भी आयोग की किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। राज्य के दोनों आयोगों ने भी पूरा डाटा आपस में साझा कर लिया है। भर्तियों की अन्य एजेंसियों को भी इस संबंध में सूचना भेजी दी गई है। किसी स्तर से नकलची अगले पांच साल तक परीक्षाएं नहीं दे पाएंगे।