कालसी। शनिवार की सुबह उत्तराखंड जल विद्युत निगम द्वारा संचालित छिबरौ पावर हाउस की टनल के अंदर कार्यरत दो मजदूरों के गायब होने से हड़कंप मच गया। मजदूरों के गायब होने की खबर सुन उनके परिजन तथा क्षेत्रीय लोगों ने पावर हाउस प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। उप जिलाधिकारी कालसी तथा पुलिस उपाधीक्षक विकास नगर व थानाध्यक्ष कालसी आदि ने पहुंच कर बामुश्किल आक्रोशित लोगों को समझाया।
जानकारी के अनुसार विगत शनिवार सुबह से उत्तराखंड जल विद्युत निगम द्वारा संचालित छिबरौ पावर हाउस की टनल के अंदर स्थित टरबाइन पर कुछ मजदूर पेंटिंग का कार्य कर रहे थे। शाम के वक्त पेंट की तेज गंध के कारण कार्य कर रहे मजदूरों को नशे का आभास हुआ। इसके पश्चात कुछ मजदूर अपनी ड्यूटी पूरी कर के बाहर निकल कर चले गए, लेकिन दो मजदूर अपना कार्य करते रहे तथा इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। रविवार की सुबह जब अन्य साथी मजदूर कार्यस्थल पर पहुंचे तो उन्होंने उपरोक्त दो मजदूरों के बारे में बताया कि यह लोग कल शाम जब हम ड्यूटी पूर्ण करने के बाद अपने अपने घर चले गए थे, तब वे मजदूर कार्य कर रहे थे। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि उपरोक्त दोनों मजदूर घुटन तथा पेंट की तेज गंध के कारण हुए नशे के चलते पैर फिसल कर नीचे बह रही नदी में बह गए। मजदूरों के परिजनों ने परिवार के सदस्य को नौकरी दिए जाने तथा उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
उप जिला अधिकारी कालसी संगीता कनौजिया ने बताया कि जल विद्युत निगम के अधिकारियों द्वारा मजदूरों के परिजनों को आश्वासन दिया गया है कि जिस प्रकार कांटेक्ट बेस पर दोनों मजदूर काम कर रहे थे उसी प्रकार परिवार के एक एक सदस्य को विद्युत गृह में नौकरी पर रखा जाएगा तथा उचित मुआवजा भी दिया जाएगा। इस अवसर पर उत्तराखंड जल विद्युत निगम के उप महाप्रबंधक कृष्णकांत जायसवाल, पुलिस उपाधीक्षक विकास नगर बीडी उनियाल, थानाध्यक्ष कालसी ऋतुराज सिंह चौहान सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व क्षेत्रीय जनता उपस्थित रहे।
ओएनजीसी के लिए कार्य करने वाली अमेरिकन कंपनी में लंबे समय तक बतौर सीनियर ऑपरेटर टेक्निकल कार्य कर चुके सेवानिवृत्त कुंवर सिंह रोहिल्ला ने बताया कि किसी भी जलविद्युत गृह में टरबाइन पानी के बीच में होती है तथा उसका पंखा भी पानी के अंदर ही होता है। जिसको जंक से बचाने के लिए पानी बंद करके समय-समय पर पेंट किया जाता है। श्री रोहिल्ला ने बताया क्योंकि पेंट में केमिकल, थिनर, तारपीन का तेल व वार्निश मिलाई जाती है जिसकी तेज गंध से दिमाग में नशा होने लगता है। विशेष तौर पर यदि ऐसे स्थान पर जहां हवा की आवाजाही ना हो तथा अपेक्षाकृत बंद जगह हो तो ऐसे में पेंट कर रहे व्यक्तियों को पेंट से गहरा नशा होने की संभावना अधिक हो जाती है।