पिछली बरसात में तबाह हुए कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग का जायजा लेकर डीएम एचसी सेमवाल लोनिवि की टीम के साथ जिला मुख्यालय लौट आए हैं।
दोनों रास्तों का विकल्प खुला रखने का फैसला
यहां आकर डीएम ने बताया कि कैलास मानसरोवर यात्रा के समय तवाघाट से आगे गाला (कैलास यात्रा का एक पड़ाव) तक जाने के लिए दोनों रास्तों का विकल्प खुला रखने का फैसला लिया गया है।
तवाघाट से खेत होते हुए नारायण आश्रम के रास्ते और मांगती, गर्वाधार के रास्ते भी गाला पड़ाव जाने की व्यवस्था रहेगी। ऐसे में यदि इनमें से कोई एक रास्ता बंद होता है तो यात्रियों के जाने के लिए दूसरे रास्ते का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
डीएम सेमवाल अपनी यात्रा के दौरान कैलास यात्रा मार्ग के दूसरे पैदल पड़ाव बूंदी तक जाकर रास्ते की स्थिति का जायजा लिया। कई स्थानों पर डीएम और उनकी टीम को खतरनाक रास्ता पार करना पड़ा।
नारायण आश्रम पहुंचने वाली सड़क खराब
उन्होंने बताया कि नारायण आश्रम तक पहुंचने के लिए इस समय खेत नामक स्थान से आगे सड़क खराब है। कंच्योती में मोटर पुल पिछले साल की आपदा के समय बह गया था।
उन्होंने बताया कि कंच्योती पुल के निर्माण के लिए पैसा मिल गया है और जल्द ही इस पुल का निर्माण कर दिया जाएगा। डीएम ने बताया कि गाला से बूंदी के बीच का रास्ता ठीक है।
कुछ स्थानों पर मरम्मत की जरूरत है, जिसे यात्रा शुरू होने से पहले दुरुस्त कर दिया जाएगा। गाला पहुंचने के लिए तवाघाट से दूसरा रास्ता मांगती, गर्वाधार होते हुए है।
सीमा सड़क संगठन तेजी से कर रहा काम
गर्वाधार और बिंद्राकोटी के बीच भी सड़क खराब है। लेकिन अच्छी बात यय है कि सीमा सड़क संगठन सड़क की मरम्मत का काम तेजी से कर रहा है।
डीएम सेमवाल ने बताया कि तवाघाट से गाला पड़ाव तक पहुंचने के लिए रास्तों के दो विकल्प तैयार रहेंगे। यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
लमारी से आगे अभी भी बर्फ
डीएम एचसी सेमवाल ने बताया कि कैलास यात्रा मार्ग पर लमारी से आगे अभी भी भारी बर्फ जमी है। बूंदी में भी बर्फ है। अप्रैल में ज्यादातर इलाकों की बर्फ पिघल जाएगी।
आमतौर पर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पैदल रास्तों को बर्फ से ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता। उनको थोड़ी सी मरम्मत की जरूरत रहती है।
एक जून से शुरू होगी कैलास यात्रा
कैलास मानसरोवर यात्रा एक जून से शुरू होगी। 2013 में आपदा के कारण कैलास दर्शनों के लिए सिर्फ एक ही दल जा पाया था। शेष 17 दलों की यात्रा स्थगित कर दी गई थी।
कैलास मानसरोवर यात्रा ठीक मानसून सीजन में होती है। उस समय भूस्खलन के कारण रास्तों के बंद होने का खतरा रहता है।