सप्ताह भर बाद भी मुख्यमंत्री हरीश रावत के उस आदेश की तामील नहीं हो सकी, जिसमें उन्होंने शहर के मास्टर प्लान में लैंड यूज चेंज में की गई धांधली की जांच कराने को कहा था।
भू-उपयोग बदलने को लेकर बड़ा खेल आया सामने
मुख्यमंत्री ने यह वक्तव्य विगत तीन मार्च को मीडिया से रूबरू होने पर दिया था। मास्टर प्लान में विभिन्न क्षेत्रों में जमीनों के भू-उपयोग बदलने को लेकर काफी बड़ा खेल सामने आया है। यह मुद्दा पिछले दिनों विधानसभा में भी उठा था।
इसके बाद कांग्रेस के तीन विधायकों नवप्रभात, उमेश शर्मा काऊ व राजकुमार ने संयुक्त रूप से एक शिकायत पत्र मुख्यमंत्री को भेजा था।
मुख्यमंत्री ने विगत तीन मार्च को इस मामले की जांच कराने के लिए आदेश अफसरों को दिए। लेकिन आज तक प्रकरण की जांच का कोई लिखित आदेश जारी नहीं हो सका।
मास्टर प्लान को लेकर थी ज्यादा शिकायतें
यहां पर यह गौरतलब है कि हरीश रावत जब मुख्यमंत्री बने तब सबसे ज्यादा शिकायतें मास्टर प्लान को लेकर ही थी। पिछली बहुगुणा सरकार में भू-उपयोग बदलने का खेल अमर उजाला ने भी काफी उजागर किया था।
मामला काफी उछला तो शासन ने वीसी एमडीडीए आर मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया। कमेटी ने अध्ययन के बाद अपनी सिफारिशें शासन को सौंपी।
अब यह खेल एमडीडीए वीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने किया या फिर शासन में प्रमुख सचिव या सचिव स्तर पर इरादेतन गड़बड़ी हुई, इसी बिन्दु की जांच होनी है।
कुछ ऐसे भी मामले सामने आएं जिनमें पुराने समय जारी अधिसूचनाओं व आदेशों को भी ताक पर रख दिया गया। इसी जांच को शुरू होने से पहले ही दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
क्योंकि इस खेल में कुछ कांग्रेसियों व भू-माफियाओं के भी शामिल होने चर्चा भी काफी पहले से हो रही है।