लोक सभा चुनाव से ठीक पहले बसपा ने उत्तराखंड में अपने दो विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया। इनमें से एक तो कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश हैं और दूसरे बसपा विधायक दल के नेता हरीदास हैं।
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बसपा ने विधानसभा अध्यक्ष से भी कह दिया है कि इन दो विधायकों का पार्टी से कोई संबंध नही हैं। बसपा फिलहाल कांग्रेस को दिए गए समर्थन को जारी रखने की बात कर रही है।
विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा पत्र
बसपा ने पार्टी से दोनों को निकाले जाने की सूचना का पत्र विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल को भी सौंप दिया है। स्पीकर ने इसकी पुष्टि की।
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बसपा के विधानसभा में कुल तीन सदस्य हैं और दो की पार्टी से निलंबित करने पर बसपा का एक मात्र सदस्य ही सदन में अब मौजूद रह पाएगा। हालांकि सुरेंद्र राकेश और हरिदास की विधानसभा सदस्यता पर फिलहाल कोई आंच न आने की बात भी की जा रही है।
लंबे समय से जारी थी बसपा में अंदरूनी कलह
बसपा के बीच यह शीतयुद्ध लंबे समय से जारी था। कुछ दिन पहले ही बसपा विधायक दल के नेता और झबरेड़ा विधायक हरीदास ने टिकट बांटने में जमकर पैसे का खेल होने का आरोप लगाकर इस मामले को और अधिक उग्र बना दिया था।
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शुक्रवार को यह मामला पूरी तरह से गरमा गया। पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजभर, प्रदेश अध्यक्ष मेघराज जरावरे और बसपा के मंगलौर विधायक सरबत करीम अंसारी ने सीधे-सीधे सुरेंद्र राकेश और हरीदास को पार्टी से निलंबित करने का ऐलान किया।
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जरावरे का आरोप था कि ये दोनों विधायक पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। दोनो ही विधायक संगठन के लोगों का सहयोग करने के बजाय उनका उत्पीड़न कर रहे थे।
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इन शिकायतों को देखते हुए ही पार्टी सुप्रीमो ने दोनो विधायकों को निलंबित करने का फैसला किया।
कांग्रेस फिलहाल राहत में, पर बढ़ सकती है चिंता
बसपा का यह अंदरूनी मामला कांग्रेस के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है। बसपा सरकार में सहयोगी दल है। बसपा ने सुरेंद्र राकेश को पार्टी से निलंबित किया है और सुरेंद्र राकेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
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मामला यहीं तक रहता है तो कांग्रेस को खास परेशानी नहीं होगी। फिलहाल दोनों की विधानसभा सदस्यता बनी रहेगी। वहीं बसपा भी फिलहाल यह नहीं कह रही है कि कांग्रेस से नाता तोड़ लिया गया है।
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बसपा प्रदेश अध्यक्ष मेघराज जरावरे के मुताबिक पार्टी का फिलहाल कोई इरादा नहीं है कि कांग्रेस से नाता तोड़ा जाए। पर जिस आधार पर इन दो विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है, अगर कांग्रेस वही तरीका अपनाती है तो बसपा को कांग्रेस से संबंध तोड़ने पर विचार करना पड़ सकता है।
बसपा खुद भी होगी प्रभावित
दो विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाने से बसपा खुद भी प्रभावित हो सकती है। इतना तय है कि बसपा का एकमात्र विधायक ही अब सदन में रह पाएगा।
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दूसरी ओर ठीक लोक सभा चुनाव से पहले अपने खेमे के कैबिनेट मंत्री को बाहर का रास्ता दिखाना बसपा को प्रभावित कर सकता है।
नहीं जाएगी सदस्यता
पार्टी से सुरेंद्र राकेश और हरीदास ने खुद ही नाता तोड़ा होता तो इनकी सदस्यता को जारी रखने के मामले में विचार किए जाने की जरूरत होती। यह कार्यवाही पार्टी के स्तर पर हुई है। लिहाजा इन सदस्यों की सदस्यता जारी रहेगी। हालांकि बसपा का मात्र एक ही विधायक सदन में रह जाएगा।
-गोविंद सिंह कुंजवाल, अध्यक्ष विधानसभा