कांग्रेस सरकार के जमाने में लागू बेरोजगारी भत्ते का भविष्य जल्द ही कैबिनेट में तय होगा। जोर-शोर से लागू हुई ये योजना ढुलमुल तरीके से आगे बढ़ते हुए फिलहाल रुकी हुई है।
नई सरकार को तय करना है कि वह बेरोजगारों को किसी तरह का भत्ता देगी या फिर नहीं। दरअसल, बेरोजगारों को लुभाने वाली इस योजना का बुरा हश्र बजट के अभाव में हुआ। आज की तारीख में भी बेरोजगारों के लिए स्वीकृत 68 करोड़ के भत्ते की व्यवस्था नहीं हो पाई है। नई सरकार इसके व्यवहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ने की सोच रही है। सेवायोजन विभाग जल्द ही पूरे मामले को चर्चा के लिए कैबिनेट में लाने जा रहा है।
2012 के विधानसभा चुनाव में जाने से पहले कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में बेरोजगारी भत्ते का वायदा किया था। विजय बहुगुणा के नेतृत्व वाली सरकार बनी, तो इस योजना को लागू कर दिया गया। मगर ये योजना सरपट दौड़ न सकी। करीब नौ लाख 49 हजार बेरोजगारों ने इस भत्ते के लिए पंजीकरण कराया था।
मगर सरकार सिर्फ 33 हजार बेरोजगारों के लिए ही भत्ते की व्यवस्था कर पाई। नई सरकार के सामने अब ये मामला आया है कि वह इस योजना को जारी रखेगी या फिर बंद करेगी। सेवायोजन मंत्री डा हरक सिंह रावत के अनुसार-बेरोजगारी भत्ते से संबंधित फाइल उनके पास आई है। सरकार इस योजना से जुडे़ आर्थिक पहलु पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है।
ताकि योजना मजाक बनकर न रहे। पूरा मामला कैबिनेट में लाया जा रहा है। इसके बाद ही तय होगा कि बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा या नहीं। रावत के मुताबिक-वैसे ये भी विचार आ रहा है कि भत्ते की जगह बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जाए। हालांकि निर्णायक फैसला बाद में ही किया जाएगा।