स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त निदेशक पद पर पदोन्नत हुए चिकित्सक स्थानांतरण से राहत के लिए अपनी बीमारी को आधार बना रहे हैं। कुछ चिकित्सक बुधवार को नियमित विभागीय मेडिकल बोर्ड में गए हैं।
तबादला नीति में चिह्नित बीमारियों में उनका मरज भी सही बैठता है तो उन्हें तबादले से राहत मिलने की संभावना बनती है। बोर्ड की सिफारिश के आधार पर स्वास्थ्य महानिदेशालय शासन को उनका प्रतिवेदन भेजेगा।
तबादला आदेश जारी होने से पूर्व आधा दर्जन से अधिक चिकित्सक मेडिकल बोर्ड की संस्तुति पर तबादले से राहत पा चुके हैं। शासन के जारी पदोन्नति और तबादला आदेश अभी 108 चिकित्सकों तक नहीं पहुंचे हैं।
नई चिकित्सक तबादला नीति के तहत अनुकंपा के आधार पर आदेशों में बदलाव संभव नहीं है, लेकिन बीमारी को आधार मानकर राहत दी जा सकती है। ऐसे में कुछ चिकित्सक बीमारी का हवाला दे रहे हैं।
स्वास्थ्य कारणों से कुछ को मिली है राहत
बताया जा रहा है कि इन चिकित्सकों ने तबादला आदेश से पहले प्रतिवेदन दिया था। ऐसे में अगर यह बीमारी मानकों पर फिट बैठते हैं तो इन्हें पहाड़ में स्थानांतरित करने से राहत मिल सकती है। बीमारी के अलावा कुछ चिकित्सकों के लंबी छुट्टी पर जाने की भी आशंका जताई जा रही है।
राहत की संभावना कम
तबादला आदेश जारी होने के बाद चिकित्सकों के पास पर्वतीय जनपदों में ज्वाइनिंग से बचने के विकल्प बेहद कम हैं। बीमारी और पारिवारिक कारणों से 10 से 12 चिकित्सकों के प्रतिवेदन सही पाए जाने पर शासन राहत दे चुका है।
अब जो चिकित्सक आदेश मिलने के एक सप्ताह के भीतर ज्वाइन नहीं करेगा वह विभागीय कार्रवाई की जद में आ जाएगा। ऐसे में डाक्टर को पदोन्नति के लाभ से वंचित होना पड़ेगा।
मुखिया विहीन पौड़ी जिला अस्पताल
डॉक्टर नहीं मिलने के कारण अब जिला अस्पताल मुखिया विहीन हो गया है। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एससी पंत बुधवार को रिलीव हो गए। अब मंडलीय निदेशक स्वास्थ्य डॉ. एसडी उनियाल ही फिलहाल यह दायित्व भी संभालेंगे। अस्पताल में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक समेत डाक्टरों के 21 पदों में 12 पद लंबे समय से रिक्त हैं।
गोपेश्वर जिला अस्पताल में 12 पद खाली
जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में चिकित्सकों की तैनाती के लिए नागरिक मंच चमोली ने प्रदर्शन किया। बताया गया कि लंबे समय से जिला चिकित्सालय में 12 से अधिक चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैं। इसके लिए नागरिक मंच अगस्त माह से लगातार पत्राचार कर रहा है, लेकिन अभी तक मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की।