फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'सजा' भुगत रहे 224 पुलिसकर्मियों को 'तोहफा'

Sat, 22 Nov 2014 01:37 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
कई साल से आर्म्ड पुलिस से सिविल पुलिस में आने की जद्दोजहद कर रहे 224 पुलिसकर्मियों की मुराद शुक्रवार को पूरी हो गई। 2012 में भर्ती हुए इन पुलिसकर्मियों को नियमानुसार अब तक पुलिस लाइन में रवानगी हो जानी चाहिए थी।
विज्ञापन


देर से ही सही विभाग ने इनके स्थानांतरण का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही जिले के थानों में तैनात अंडर ट्रेनिंग 242 पुलिसकर्मियों पर लाइन रवानगी की तलवार भी लटक गई है।

अधिकांश पुलिस कर्मियों को आर्म्ड पुलिस (एपी) में दो से लेकर छह साल तक हो गए थे। पिछले साल सिपाहियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने आईजी मुख्यालय को नियमानुसार कार्रवाई का आदेश दिया था। उस समय कुमाऊं रेंज के पुलिसकर्मी की तो वापसी हो गई थी, लेकिन गढ़वाल रेंज का मामला अटका हुआ था।
विज्ञापन

हरिद्वार और टिहरी से भी मांगी गई सूची

डीआईजी गढवाल रेंज संजय गुंज्याल के अनुसार आर्म्ड पुलिस के 224 पुलिसकर्मियों को सिविल पुलिस में स्थानांतरित कर दिया गया है। हरिद्वार और टिहरी के पुलिस कप्तानों से संस्तुति के साथ सूची मांगी गई है, ताकि पुराने पुलिसकर्मियों को चरित्र पंजिका के आधार पर वापस सिविल पुलिस में तैनाती दी जा सके। अंडर ट्रेनिंग पुलिसकर्मियों पर जल्द फैसला ले लिया जाएगा।

यह है नियम
सिविल पुलिस से आर्म्ड पुलिस भेजे गए पुलिसकर्मियों की दो साल की सेवा से कम की अवधि में एसएसपी उनका स्थानांतरण कर सकते हैं।
दो साल से अधिक की अवधि होने के बाद डीआईजी स्तर से उनका स्थानांतरण होता है।
दस साल से अधिक की सेवा होने की स्थिति में आर्म्ड पुलिस से सिविल पुलिस में आने का रास्ता बंद हो जाता है। इसके बाद कोर्ट से ही मदद मिल पाती है।
एसएसपी चाहें तो सिविल पुलिस के किसी भी सिपाही को अस्थाई तौर पर छह माह के लिए एपी में स्थानांतरित कर सकते हैं।
विज्ञापन

सजा के तौर पर जाते हैं आर्म्ड पुलिस

पुलिस नियमावली के खिलाफ आचरण करने पर पुलिसकर्मियों को सिविल से आर्म्ड पुलिस में भेजा जाता है। भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और आपराधिक मामले पंजीकृत होने की स्थिति में सजा के तौर पर उन्हें आर्म्ड पुलिस में भेजा जाता है। आर्म्ड पुलिस में भेजे जाने को आम तौर पर सजा के तौर पर माना जाता है।

वहीं, पुलिसकर्मियों का एक तबका ऐसा भी होता है तो थानों की झिकझिक से बचने के लिए एपी में रहना ज्यादा पसंद करता है।

यह रहती है ड्यूटी
आर्म्ड पुलिस में रहते हुए पुलिसकर्मियों को विचाराधीन बंदियों को जेल से कोर्ट लाने और ले जाने के अलावा जनप्रतिनिधियों के गनर की ड्यूटी करनी पड़ती है। इसके अलावा राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री आदि की सुरक्षा गार्ड में ड्यूटी दी जाती है। कानून व्यवस्था की ड्यूटी में भी इनका उपयोग किया जाता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें